सपा प्रत्याशी सुधन रावत की हार की गाज नगर आयुक्त आरके सिंह पर भी गिरी। दिनभर काम करने के बाद वह देर रात घर पहुंचे तो उन्हें हटाए जाने का फैक्स मिल गया। वह दो दिन पहले ही में एक महीने की चुनाव ड्यूटी कर आंध्र प्रदेश से गाजियाबाद लौटे थे।
नगर आयुक्त आरके सिंह का गाजियाबाद कार्यकाल एक साल 11 दिन का रहा। उन्होंने 11 मई 2013 को गाजियाबाद नगर आयुक्त के पद पर ज्वाइन किया था। उनका यह कार्यकाल निर्विवाद रहा।
महापौर तेलूराम कांबोज और निगम पार्षदों से भी उनका तालमेल पूर्व के नगर आयुक्तों की अपेक्षा अच्छा रहा। गाजियाबाद में आने के पांच महीने बाद अक्तूबर में ही उन्हें आईएएस कैडर भी मिल गया। अब 8 अगस्त 2014 को उन्हें दो महीने की ट्रेनिंग के लिए जाना था। लेकिन इससे पहले ही उन्हें ट्रांसफर लैटर मिल गया।
नगर आयुक्त आरके सिंह ने इसकी पुष्टि की। उन्हें फिलहाल वेटिंग में रखा गया है। इससे पहले उन्हें किसी जिले का डीएम बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन अब अचानक हटाकर वेटिंग में रखे जाने से माना जा रहा है कि सपा प्रत्याशी की बड़ी हार से पार्टी हाईकमान उनसे नाराज था। पार्टी के जिला संगठन की ओर से भी उनकी शिकायत पहुंची थी।
आशु मलिक के घर में भी हारे सुधन
देश के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री (युवा कल्याण परिषद उपाध्यक्ष) रहे आशु मलिक अपने घर से भी सपा प्रत्याशी सुधन रावत को नहीं जिता पाए। उनके मतदान केंद्र पर कांग्रेस के प्रत्याशी राजबब्बर पहले और भाजपा प्रत्याशी वीके सिंह दूसरे स्थान पर रहे। सपा को काफी अंतर से तीसरा स्थान मिला था।
आशु मलिक की लाल बत्ती छिन चुकी है। उनकी लाल बत्ती छीनने के पीछे कारण कोई भी रहा हो, लेकिन सुधन रावत की मुरादनगर से करारी हार भी कारणों में मानी जा रही है। आशु मलिक का मतदान केंद्र हंस इंटर कालेज पड़ता है।
इस पर 127 नंबर से लेकर 135 नंबर तक नौ बूथ थे। लगभग सभी बूथों पर कांग्रेस प्रत्याशी राजबब्बर और भाजपा के वीके सिंह के बीच टक्कर रही। सपा प्रत्याशी सुधन रावत मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद भी दूर-दूर तक मुकाबले में नजर नहीं आए।
सपा को इस केंद्र पर मात्र 433 वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 2968 और भाजपा को 972 मत मिले। खुद आशु मलिक के बूथ नंबर 135 पर कांग्रेस को 282, भाजपा को 318, बसपा को 65 एवं सपा को मात्र 36 मत ही मिल पाए है। मुरादनगर विधानसभा में सपा को काफी कम मत मिले हैं।