मुंडका अग्निकांड में अपनों की तलाश करते लोग
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मुंडका में हुई भीषण त्रासदी में मौत के चंगुल से बचकर आई घायल लड़कियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। लड़कियां अपने परिजनों के साथ शनिवार को घटनास्थल पर पहुंची थी। जिसमें दो लड़कियों का हाथ झुलस गए थे जबकि जान बचाने की जद्दोजहद में एक के पैर में गंभीर चोट लगी थी। अपने साथ काम करने वाली लड़कियों और महिलाओं की मौत से सभी आहत थी।
सीसीटीवी कैमरों और राउटर निर्माण कंपनी कोफे इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाली धनवंती और आयशा के हाथ झुलस गए हैं जबकि काजल के पैर में चोट लगी है। पीड़ितों ने बताया कि शुक्रवार को घटना के समय वह दूसरी मंजिल पर मौजूद थी। जहां कंपनी की ओर से बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक के दौरान लाइट चली गई। उनके बाद जनरेटर को चालू किया गया। उसके कुछ देर बाद ही कमरे में धुंआ आने लगा। जब तक वह कुछ समझ पाते धुंआ से लोगों का दम घुंटने लगा।
वहां मौजूद लोगों ने धुंआ को निकालने के लिए इमारत में लगे कांच को तोड़ने की बात कही। आरोप है कि कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया और इससे कंपनी को नुकसान होने की बात कही। पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी के लिए उनकी जान की कीमत से बड़ी शीशे की कीमत थी। इस बात को कहने के बाद गुस्साए पीड़ित और उसके परिजनों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया।
पीड़ितों ने कहा कि उनकी जान की भी कीमत है और इस घटना के लिए कंपनी के मालिक और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन लोगों आगे बताया कि थोड़े ही देर में धुंए के गुब्बार से कमरा भर गया और लोग जान बचाने के लिए जद्दोजहद करने लगे और कुछ लोग सीढ़ियों की तरफ भागे लेकिन सीढ़ियों के पास धुएं का गुब्बार था। जहां से निकलना किसी के लिए भी संभव नहीं हुआ। लोग फिर सड़क की तरफ आ गए और शीशे को तोड़ने की मांग करने लगे। इसी दौरान बाहर मौजूद कुछ लोगों ने इमारत से धुंआ निकलते देखा और फिर शीशे को तोड़कर बचाव का काम शुरू किया। जिसकी वजह से कुछ लोगों की जान बच पाई।