साल 1987 में हाशिमपुरा नरसंहार मामले में हाईकोर्ट ने तत्कालीन गृह राज्यमंत्री पी चिदंबरम की भूमिका की जांच करने संबंधी दायर याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। अदालत ने सुनवाई 12 सितंबर तय करते हुए यूपी सरकार से जवाब-तलब किया है।
न्यायमूर्ति वीपी वैश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यूपी के मुख्य सचिव को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने यह निर्देश भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा दायर सिंगल जज के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है। याची ने इससे पहले निचली अदालत के 8 मार्च 2013 के उस फैसले का चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
स्वामी ने तर्क रखा है कि जिन पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चल रहा है, उन्होंने केवल अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन किया था। पी चिदंबरम उस समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे, ऐसे में इस मामले में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।
मामला 1987 में मेरठ जिले के हाशिमपुरा इलाके में एक विशेष समुदाय के 42 युवकों की हत्या से जुड़ा है। इस मामले में पीएसी के 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इनमें से तीन की मृत्यु हो चुकी है और अब 16 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा चल रहा है।