फरीदाबाद में हड़ताल के दौरान ‘नो वर्क नो पे’ की घोषणा के बाद कई विभागों के कर्मचारियों ने सरकार और विभाग की आंख में धूल झोंकी।
एक तरफ वे हड़ताल पर भी थे, प्रदर्शन कर रहे थे तो दूसरी ओर उन्होंने गुपचुप तरीके से अपनी हाजिरी भी लगाई। इन सबका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ा।
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सरकारी रिकॉर्ड में स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी हड़ताल पर नहीं था। खुफिया विभाग ने इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, हुडा में 546 कर्मचारी हैं। इनमें से एक भी हड़ताल पर नहीं रहा। यानी सभी की हाजिरी लगी है, लेकिन हुडा कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
इसी तरह जिले में 2500 आंगनबाड़ी वर्कर हैं, जिनमें से अधिकांश हड़ताल पर थीं, लेकिन सरकारी रिपोर्ट कहती है कि वह हड़ताल पर नहीं थीं। जबकि कर्मचारी नेता युद्धवीर खत्री ने बताया कि आंगनबाड़ी वर्कर हड़ताल पर थीं।
दूसरी ओर पावर कॉरपोरेशन के बारे में जो रिपोर्ट दी गई है उसके मुताबिक 86 फीसदी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सवाल यह उठता है कि सिर्फ 14 फीसदी कर्मचारियों में कैसे काम चलाया गया। बिजली कर्मचारी नेता कुलदीप सिंह का कहना है कि बिजली निगम ने अपने जानकार ठेकेदारों से हड़ताल के दौरान काम करवाया।
बाजारों में निकाला रोष जुलूस
फरीदाबाद के सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने हड़ताल के अंतिम दिन बाजारों में जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। इनमें स्वास्थ्य, बिजली और नगर निगम के कर्मचारी प्रमुख तौर पर शामिल रहे। आईटीआई कर्मियों ने भी प्रदर्शन किया।
सभी सरकारी विभागों के कर्मियों ने बीके चौक से नीलम चौक से होते हुए एक नंबर बाजार तक रैली निकाली। गुस्साए कर्मचारियों ने बीके अस्पताल के प्रशासनिक विंग में काम करने वाले क्लर्क को भी शामिल कर लिया। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी चरमराई रही।
मारपीट के आरोपी बिजली कर्मी पर केस दर्ज
हड़ताल के तीसरे दिन भी बिजली निगम ने हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया। तकनीकी फॉल्ट को ठीक करने गए एक कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप में ओल्ड फरीदाबाद के लाइनमैन ऋषिपाल के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। उधर, 21 जनवरी से पुलिस हिरासत में गए चार बिजली कर्मियों को जमानत मिल गई है।