सरकार ई-मार्केटिंग के जरिये प्रदेश की मंडियों की सूरत बदलने का दावा कर रही है लेकिन हालत कुछ और ही स्थिति बयां कर रही है। जिले में कुल 4 मंडियां और 2 खरीद केंद्र बने हुए हैं। अब तक दो लाख 57 हजार 560 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। किसानों के लिए मंडियों में किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है।
अधिकांश मंडियों में पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। मोहना व फतेहपुर में खरीद केंद्र बने हुए हैं। जबकि बल्लभगढ़, सेक्टर 16, डबुआ और तिगांव में गेहूं मंडी स्थापित है। इन सभी जगह सुविधाओं का टोटा है। बिना तैयारी गेहूं की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसके चलते किसान परेशान हैं।
बल्लभगढ़ मंडी
यह जिले की सबसे बड़ी मंडी है और गेहूं की आवक भी सबसे पहले शुरू हो जाती है। किसानों के लिए चार वाटर कूलर काफी समय पहले लगाए गए थे लेकिन किसानों के जमावड़े के बाद भी यहां पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। एक ही वाटर कूलर चालू हालत में है, जिस पर लाइन लगी रहती है। मंडी में आज तक गेट नहीं लग पाया है। इसके चलते किसानों को हर रोज असामाजिक तत्व परेशान करते हैं। मार्केट कमेटी ने अब तक चौकीदारों की व्यवस्था नहीं की है। बारदाना न होने से कभी भी गेहूं की खरीद रुक जाती है।
डबुआ मंडी
मंडी में सफाई के नाम पर खानापूर्ति भी नहीं हो रही। चारों तरफ गोबर व गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। जलभराव की समस्या 12 महीने बनी रहती है। यहां भी किसानों के लिए पेयजल की सुविधा नहीं है। आढ़ती अपनी तरफ से ड्रमों में पानी भरवाते हैं। ये ड्रम भी खुले रहते हैं। खरीद का सीजन शुरू होने के बाद भी स्ट्रीट लाइटों को ठीक नहीं कराया गया। हालांकि, लाखों रुपये खर्च कर सड़क बनाई गई लेकिन पानी की निकासी की समस्या अब भी बनी हुई है।
ओल्ड फरीदाबाद
मंडी में गेहूं की खरीद शुरू नहीं हुई है। हरियाणा मार्केटिग बोर्ड का चबूतरा अभी नहीं बन पाया है। अगर यहां खरीद शुरू होती है, गेहूं का स्टॉक रखने में किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। मंडी में किसानों के पीने के पानी के लिए सिथेटिंक टैंक लगाए हुए हैं। इन टैंकों में मौसम गर्म होने के कारण पानी गर्म हो जाएगा, जिसमें किसान मजबूरी में पीएंगे और बीमार होंगे।
तिगांव मंडी
तिगांव की अनाज मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम है। गेहूं मंडी के कायाकल्प के वादे हर हर राजनीतिक दल ने किए, लेकिन दावों को हकीकत में कोई नहीं बदल सका। खुले आसमान के तले हजारों क्विंटल गेहूं पड़ा हुआ है। मौसम खराब होने पर सारा गेहूं खराब होने का डर किसानों को सता रहा है। मंडी में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
फतेहपुर बिल्लौच मंडी
मार्केट कमेटी ने गेहूं खरीद केंद्र यहां भी बनाया है। खरीद शुरू हो गई है। लेकिन यहां भी किसानों के सामने समस्याओं का अंबार है। न पीने का पानी है, न बैठने की जगह। रात्रि विश्राम के लिए जगह तो छोड़िए, किसानों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ रही है। चारदीवारी न होने के कारण मंडी परिसर में गांव वाले उपले थाप रहे हैं। गेहूं की चोरी भी बड़ी समस्या है, इसके लिए किसान खुद ही रातभर जागकर रखवाली कर रहे हैं।
मोहना मंडी
कहने को ही यहां गेहूं की खरीद का केंद्र है। लंबे अर्से बाद भी हर साल खेतों में खुले में गेहूं डाल दिया जाता है। मार्केट कमेटी यहां आज तक अपना कार्यालय नहीं खोल पाई। किसानों का आरोप है कि मंडी में उत्तर प्रदेश से आने वाले गेहूं की खरीद हो रही है। बाहरी गेहूं पर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। मंडी में बिजली, पानी और शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। हालांकि, 57.5 लाख रुपये की लागत से किसान विश्राम गृह, दो शेड और प्लेटफॉर्म बनाने की योजना है, लेकिन किसानों को इन सुविधाओं को पाने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल किसानों को पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है।
तिगांव, सेक्टर-16 मंडी में किसानों के लिए पीने का पानी, बैठने और आराम करने की सुविधा है। मंडी में अन्य विकास कार्य भी जारी है। आने वाले दिनों में मंडी की सूरत बदली नजर आएगी। - लता, सचिव मार्केट कमेटी फरीदाबाद
बल्लभगढ़, मोहना मंडी में जुआरियों का आतंक है। पुलिस व मार्केट कमेटी को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है। लेकिन सुनवाई नहीं होती। आढ़ती को हर रोज इस समस्या से जूझना पड़ता है। - सुनील भारद्वाज, प्रधान व्यापारी एसोसिएशन
मार्केट कमेटी द्वारा किसानों को तरह-तरह की सुविधाएं देने की बात कही जाती है। लेकिन बल्लभगढ़ अनाज मंडी ऐसा कुछ नहीं है। किसानों को अपने फसल की सुरक्षा खुद करनी पड़ती है। मंडी में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां पानी खरीदकर पीना पड़ता है। - प्रेम सिंह, किसान गांव हरफला
पिछले साल बारिश के कारण गेहूं की पूरी फसल बर्बाद हो गई। इसलिए किसान जल्दी से जल्दी गेहूं को बेचना चाहता है। लेकिन मंडियों में ऐसी व्यवस्था नहीं है। किसानों को फसल बेचने में तीन से चार दिन लग जाते हैं। - देवकिशन, किसान गांव ततारपुर