विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने बताया कि मोदीनगर थाने में 19 मई 2020 को एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई। व्यक्ति ने बताया कि उनकी सात वर्षीय बच्ची को पिलखुवा निवासी गौरव चॉकलेट दिलाने के बहाने बाइक पर बैठाकर अपने साथ ले गया था। उसने बच्ची के साथ कुकर्म कर गला दबाकर उसकी हत्या कर शव वहीं छुपा दिया। पुलिस की जांच में पता चला था कि घटना वाले दिन गौरव गधे पर लाद कर मिट्टी डालने का काम कर रहा था। उसने पहले बच्ची को 20 रुपये देकर पास में स्थित परचून की दुकान पर चॉकलेट लेने भेज दिया।
बाद में पीछे से दुकान पर पहुंच कर मासूम को अपने साथ मोटरसाइकिल पर बिठाकर अमराला गांव के जंगल में ईंट भट्ठे के पास बने मकान में ले जाकर बच्ची के साथ कुकर्म किया। पकड़े जाने के डर से मासूम की गला दबाकर हत्या कर दी और शव वहीं छुपा दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान बच्ची के पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की तब मामले का खुलासा हुआ था। पुलिस की पूछताछ में गौरव ने बताया था कि वारदात के समय बच्ची के पिता, दादा व दादी राशन की दुकान पर राशन लेने गए थे, जबकि बच्ची की मां बीमार होने के कारण घर के अंदर थी।
गौरव ने बच्ची से पीने के लिए पानी मांगा तो बच्ची ने बोतल में पानी लाकर दिया। गौरव ने उसे चॉकलेट लाने के लिए 20 रुपये दिए थे, उसके बाद घटना को अंजाम दिया। सोमवार को सजा के प्रश्न पर बहस करते हुए पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता योगेंद्र कुमार सिंह ने दलील देते हुए आजीवन कारावास की सजा दिए जाने की मांग की। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपी को नवयुवक बताते हुए कम से कम सजा दिए जाने की गुहार लगाई।