दिल्ली में सरकार गठन का सीन उपराज्यपाल नजीब जंग की डिटेल रिपोर्ट में फंसता नजर आ रहा है। उपराज्यपाल भाजपा को सरकार बनाने के लिए अभी जल्दबाजी में न तो बुलावा देने जा रहे हैं और न ही दिल्ली विधानसभा भंग करने जा रहे हैं।
इस प्रक्रिया को संविधान प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के राजनीतिक सेहत से जोड़कर देख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि अभी जल्दबाजी में उपराज्यपाल या केंद्र सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया होती है तो अक्तूबर में दिल्ली विधानसभा का चुनाव कराना पड़ सकता है। क्योंकि हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और झारखंड के चुनाव उसी दौरान होने हैं।
केजरी की मुलाकात ने बदले समीकरण!
वर्तमान माहौल में भाजपा चुनाव नहीं चाहती है। ऐसे में यहां राष्ट्रपति शासन 16 फरवरी तक बिना किसी आगामी मंजूरी जारी रह सकता है।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की तरफ से बार-बार सरकार बनाने केलिए नंबर गेम के दावों के बीच अरविंद केजरीवाल की मुलाकात से उपराज्यपाल पर दबाव जरूर बढ़ा है।
ऐसे में भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव और फिर उपराज्यपाल से उनकी मुलाकात से दिल्ली के राजनीतिक भविष्य का फैसला भी इसके साथ जुड़ गया है।
आसान नहीं है सरकार का नंबर गेम
लोकसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा ने बताया कि दल बदल कानून में 2003 में जो बदलाव हुआ है, उसके हिसाब से जब भी राजनीतिक दल में टूट-फूट सदस्य करेंगे, सदस्यता चली जाएगी।
ऑप्शन सिर्फ यही है कि दो तिहाई सदस्य एक अलग पार्टी बनाकर किसी अन्य पार्टी में विधानसभा अध्यक्ष की स्वीकृति से विलय करें। कांग्रेस विधायक एक मंच पर आकर मना कर चुके हैं।
फिर आप के 18 विधायक एक साथ आएंगे, तभी कुछ होगा। जहां तक चुनाव कराने की बात है तो उसमें गृह मंत्रालय, चुनाव आयोग और फोर्स का संयुक्त फैसला जुड़ा हुआ है।
राष्ट्रपति को भेजेंगे विस्तृत रिपोर्ट
उपराज्यपाल सचिवालय से जारी बयान के बयान के अनुसार अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के 24 विधायकों के साथ उपराज्यपाल नजीब जंग से मिले।
उन्होंने विधायकों की खरीद फरोख्त के प्रयास का आरोप लगाते हुए विधानसभा भंग करने की मांग की।
उपराज्यपाल ने कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अन्य राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श करके एक विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रपति के विचार के लिए भेजेंगे।