दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लगातार विधानसभा भंग कर नये सिरे से चुनाव कराने की मांग की जाती रही है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो इस मामले में एलजी से मिलकर अपना पत्र भी सौंपा था। बाद में पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
लेकिन एलजी कभी भी दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने के पक्ष में नहीं रहे। उन्होंने केजरीवाल की 49 दिनों वाली सरकार के इस्तीफा देने के बाद 16 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हुए विधानसभा को निलंबित रखने का प्रस्ताव किया था।
जानकारी के मुताबिक एलजी बार-बार दिल्ली पर चुनावी खर्च का बोझ नहीं डालना चाहते हैं। वह दिल्ली में सरकार बनाने का रास्ता निकालने के पक्ष में हैं। केजरीवाल सरकार का इस्तीफा होने के बाद उन्होंने इसीलिए विधानसभा को भंग नहीं किया था।
7 दिन के भीतर साबित करना होगा बहुमत
दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया था कि राष्ट्रपति या उप राज्यपाल ही दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर अंतिम फैसला करेंगे।
ऐसे में उप राज्यपाल ने संकेत दिए हैं कि वह 16 मई को लोकसभा चुनावों के परिणाम आते ही दिल्ली की सबसे अधिक विधायकों वाली भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं।
अगर एसी स्थिति बनती है तो कानून के मुताबिक बीजेपी को सात दिन के भीतर विधानसभा मे बहुमत साबित करना होगा।
किससे होगा जोड़-तोड़?
70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 32 विधायक हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी से निष्कासित विधायक विनोद कुमार बिन्नी के भी भाजपा में शामिल होने की संभावना है। दरअसल, बिन्नी भाजपा से पार्षद रह चुके हैं।
उन्होंने भाजपा छोड़कर ही आप से चुनाव लड़ा था। अब आप से रिश्तों में खटास आने के बाद लगातर उनके घर वापसी की संभावनाएं जताई जा रही हैं। ऐसे में भाजपा के पास कुल 33 विधायक हो जाएंगे। इसके बाद एक निर्दलीय और एक जेडीयू के विधायक हैं। बहुत संभव है कि ये भी बीजेपी का साथ दें। ऐसे में कुल विधायकों की संख्या हो जाती है 35 और दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कुल 36 विधायकों की जरूरत होती है।
अब लोकसभा चुनावों के परिणाम भी दिल्ली के समीकरणों पर खासा प्रभाव डालेंगे। दरअसल, लोकसभा चुनावों में टिकट बंटवारे और कुछ अन्य फैसलों के चलते आप के बहुत सारे कार्यकर्ता पार्टी से नाराज हैं। फिलहाल आप के पास 27, जिसमें एक विधानसभा अध्यक्ष यानी कि 26 विधायक और कांग्रेस के पास 8 विधायक हैं।
हर्षवर्धन जीते तो क्या होगा?
डॉ. हर्षवर्धन ही नहीं इस बार बीजेपी के तीन विधायक दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। चांदनी चौक से डॉ. हर्षवर्धन, पश्चिमी दिल्ली से परवेश वर्मा व दक्षिणी दिल्ली से रमेश बिधूड़ी। हाल ही में आए एनडीटीवी व हंसा रिसर्च के सर्वे के अनुसार ये तीनों जीत भी दर्ज करने वाले हैं।
ऐसे में बीजेपी के पास न केवल तीन विधायक कम हो जाएंगे, बल्कि सीएम पद का उम्मीदवार भी नये सिरे से चुनना पड़ेगा।
इसीलिए दूसरा पहलू यह भी बताया जा रहा है कि अगर केंद्र में बीजेपी की सरकार बनती है और दिल्ली में बीजेपी को छह या सात सीटें मिलती हैं तो पार्टी सरकार बनाने की बजाय चुनाव कराने का पक्ष लेगी।