विभागों को निर्देश दिया है कि परियोजना से जुड़े अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने में देरी नहीं होनी चाहिए। डीडीए, वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग इत्यादि से पूरा सहयोग भी मांगा है।
दिल्ली एम्स को विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए एक माह में दूसरी बार दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। सोमवार को बैठक में एम्स के अलावा डीडीए, दिल्ली सरकार और नीति आयोग के अधिकारी मौजूद रहे।
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इस दौरान अलग अलग विभागों से मिलने वाले गैर आपत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को लेकर सवाल उठे। बैठक में बताया गया कि एम्स के मास्टर प्लान को पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से एक-एक वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया गया है। इन अधिकारियों से वर्तमान स्थिति को लेकर उपराज्यपाल ने जानकारी हासिल की। बैठक के अंत में एलजी ने निर्देश दिए हैं कि एम्स के इस प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। कागजी प्रक्रिया को लेकर सभी विभागों को एकजुट होकर संस्थान की सहायता करनी चाहिए। इससे पहले बीते माह दो फरवरी को भी एलजी ने एम्स के मास्टर प्लान को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की।
विभागों को निर्देश दिया है कि परियोजना से जुड़े अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने में देरी नहीं होनी चाहिए। डीडीए, वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग इत्यादि से पूरा सहयोग भी मांगा है। बैठक के दौरान परियोजना से जुड़े अहम भागों पर भी चर्चा की गई जिसमें एम्स से लेकर ट्रामा सेंटर के बीच यूनिवर्सिटी के लिए विस्तार देना शामिल है। बैठक में यह भी तय हुआ है कि उपराज्यपाल की अध्यक्षता में परियोजना से जुड़ी कार्यवाही को लेकर निगरानी जारी रहेगी। अगले महीने फिर से एक और समीक्षा बैठक होगी जिसमें अब तक हुए कार्यों के बारे में उपराज्यपाल जानकारी मांग सकते हैं।
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जानकारी के अनुसार दिल्ली एम्स ने कई साल पहले ही मास्टर प्लान तैयार कर विश्व स्तरीय मेडिकल यूनिवर्सिटी बनाने की योजना बनाई है। हालांकि अभी तक यह योजना कागजों पर है। इसके अनुसार एम्स के मुख्य परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र से लेकर सड़क के दूसरी ओर सफदरजंग अस्पताल के आसपास का क्षेत्र और ट्रामा सेंटर तक पूरा एक परिसर होगा। एम्स और ट्रामा सेंटर के बीच एक सुरंग भी शुरू हो चुकी है जिसका इस्तेमाल दोनों अस्पतालों के बीच मरीज व अन्य स्टाफ के आवागमन को लेकर होता है। एम्स प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही परियोजना पर काम शुरू होगा। सभी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया अभी चल रही है। एक बार यह एकत्रित होने के बाद टेंडर इत्यादि की प्रक्रिया भी शुरू होगी।