दक्षिणी दिल्ली को कचरा मुक्त करने के लिए सोमवार को सरिता विहार क्षेत्र में एसडीएमसी महापौर और निगमायुक्त ज्ञानेश भारती ने 5 टन प्रतिदिन क्षमता के बायोमिथिनेशन संयंत्र का उद्घाटन किया। इस संयंत्र से कचरे के निस्तारण से बिजली व खाद बनाई जाएगी, लेकिन इससे किसी तरह का अपशिष्ठ नहीं निकलेगा।
इस मौके पर महापौर ने दिल्ली की जनसंख्या में तेजी से हो रही वृद्धि और उपलब्ध सीमित संसाधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) प्राकृतिक संसाधनों का तर्कसंगत उपयोग और संरक्षण कर रहा है। उन्होंने ने बताया कि एसडीएमसी ने चार बायोमिथिनेशन प्लांट लगाने का फैसला किया है जिनमें से दो बायोमिथिनेशन संयंत्र पंजाबी बाग और सेक्टर-14 द्वारका में लगाए जा चुके हैं, जबकि तीसरे संयंत्र को सरिता विहार में अब शुरू किया गया है। चौथा संयंत्र भी जल्द ही दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में शुरू किया जाएगा।
वहीं निगमायुक्त ज्ञानेश भारती ने संयंत्र के बारे में कहा कि बायोमिथिनेशन संयंत्र प्ले मॉडल पर आधारित है और इसे किसी भी समय एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। इसमें से कुछ भी अपशिष्ट नहीं निकलता और इनकी कम से कम पानी से सफाई की जा सकती है। यह संयंत्र जैविक कचरे को प्रोसैस करके बिजली और जैविक खाद और कम्पोस्ट बनाता है। एक बायोमिथिनेशन संयंत्र की लागत 1.74 करोड़ रुपये है और इसमें प्रतिदिन 5 मीट्रिक टन कचरे की खपत होती है। इस संयंत्र से 250 किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा जिसे नेट मीटरिंग से ग्रिड में डाला जायेगा।
यह प्रतिदिन 75 किलो. खाद भी बनायेगा। इसके बहु-पर्यावर्णीय लाभ हैं- जैसे ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरे का निष्पादन, विकेंद्रीयत निष्पादन को बढ़ावा, लैंड फिल साइट के बोझ में कटौती, परिवहन के दौरान कार्बन डाईऑक्साइड और मिथेन गैस के उत्सर्जन में कमी और बिजली बनाते समय इंधन की खपत नहीं होना। इस मौके पर मध्य जोन उपायुक्त विश्वेंद्र, अध्यक्ष वार्ड समिति कमलेश शुक्ला, ई.एन.सी संजय जैन, स्थानीय पार्षद नीतू चौधरी समेत अन्य लोग मौजूद थे।