दो दिनों बाद कुर्सी छोड़ने के एलान ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं, मसलन पार्टी और विधायकों के दबाव में फैसला वापस ना ले लें। पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर पूरा मुद्दा ही दूसरी ओर मोड़ दिया है। राजनीतिक मायने-मतलब की बात करें तो आम आदमी पार्टी और विधायक इस्तीफा नहीं देने का दबाव बना सकते हैं। इसके लिए वह सर्वे भी कराकर जनता के मत जानना चाहेंगे। क्योंकि जेल जाने से पहले मुख्यमंत्री ने सर्वे कराकर जेल से ही शासन करने का निर्णय लिया था।
उधर, यह भी माना जा रहा है कि जमानत की जो शर्तें हैं, उससे सीएम की कुर्सी बेमानी प्रतीत हो रही थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देते हुए भी मुख्यमंत्री कार्यालय न जाने और किसी महत्वपूर्ण फाइल पर हस्ताक्षर न करने का आदेश दे दिया था।
केजरीवाल के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था : बिधूड़ी
भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। इन शर्तों के बाद वह सरकार नहीं चला पाते। जमानत देते हुए साफ तौर से कहा गया था कि वह मुख्यमंत्री के रूप में काम नहीं कर सकते। सचिवालय में जाने पर रोक लगा दी गई और किसी फाइल पर हस्ताक्षर करने से भी रोक दिया गया और गिरफ्तारी को भी वैध बताया गया। इसलिए दिल्ली में सांविधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई थी और केजरीवाल के पास अब इस्तीफा देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।
आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल की जमानत के बाद जो जश्न का माहौल बनाया और इसे उनकी जीत बताया गया, उसकी भी हवा निकल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत तो दे दी लेकिन अब मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके हाथ से निकल रही है। यह आशंका भी व्यक्त की है कि केजरीवाल के इस्तीफे की घोषणा सिर्फ दिखावा भी हो सकती है। विधायक दल की बैठक बुलाकर पद न छोड़ने की बात कर सकते है। उपराज्यपाल को इस्तीफा सौंपते हैं, तभी यह माना जाएगा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है क्योंकि उनके पास कोई और वैधानिक रास्ता भी नहीं बचा।