फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जामा मस्जिद के शाही इमाम बोले: 'सरकार बंद करे वे दरवाजे जिनसे बह रही नफरत-सांप्रदायिकता की हवा, मुस्लिमों को मोदी से उम्मीद'

Fri, 29 Apr 2022 10:13 PM IST
Vikas Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

शाही इमाम बोले हिंदू और मुसलमान पारंपरिक रूप से एक-दूसरे के जुलूसों और त्योहारों का सम्मान करते रहे हैं। लेकिन क्या अन्य समुदायों के धार्मिक स्थलों के बाहर तलवार-पिस्तौल लेकर और नारेबाजी करने की यह नई परंपरा सही है?
विज्ञापन
जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हाल ही में देश में हुईं सांप्रदायिक घटनाओं पर लगाम लगाने की अपील की है।  उन्होंने कहा कि देश को सांप्रदायिक नफरत की आग में जलने के लिए नहीं छोड़ सकते हैं।

विज्ञापन


हिंदू-मुस्लिम दोनों समाज के लोग नहीं चाहते हिंसा हो
शाही इमाम ने यह बातें शुक्रवार को अलविदा की नमाज पर के बाद कही। उन्होंने कहा कि वो जल्द प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर उनसे मिलने का वक्त मांगेंगे। उन्होंने कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम दोनों समाज के लोग नहीं चाहते कि किसी तरह की हिंसा हो। सभी लोग पहले ही कोरोना महामारी के कारण आर्थिक तंगी से जुझ रहे हैं।  



जहांगीरपुरी में बुलडोजर कार्रवाई गलत
शाही इमाम ने जहांगीरपुरी में हुई बुल्डोजर कार्रवाई को गलत ठहराया। उन्होंने सवाल करते हुए पूछा क्या जहांगीरपुरी में जो बुलडोजर चलाया गया वह सही था? जिनके घर और दुकानें तोड़ी गईं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम भी शामिल थे, रो रहे थे और गुहार लगा रहे थे। कई ऐसे थे जिनके पास दस्तावेज थे लेकिन वे उन्हें नहीं दिखा सके और उनके घर तोड़ दिए गए। अगर सही इंक्वायरी होती तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाता। शाही इमाम ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब उत्तर प्रदेश में बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया तो वे चुप रहे।
विज्ञापन


क्या यह नई परंपरा सही है?
शाही इमाम बोले हिंदू और मुसलमान पारंपरिक रूप से एक-दूसरे के जुलूसों और त्योहारों का सम्मान करते रहे हैं। लेकिन क्या अन्य समुदायों के धार्मिक स्थलों के बाहर तलवार-पिस्तौल लेकर और नारेबाजी करने की यह नई परंपरा सही है? उन्होंने आगे कहा, नफरत की दीवारों को तोड़ने की जरूरत है क्योंकि दोनों समुदायों के बीच 'मतभेद' देश के लिए हानिकारक और चिंताजनक हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें