वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने घोषणा करते हुए कहा है कि एक नवंबर से केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस छह-अनुपालक डीजल बसों को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। बता दें यह नियम निजी बसों में भी लागू होगा। परिवहन विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान परिवहन विभाग की प्रतिदिन कई बसें चलती हैं। वहीं, निजी बसें भी रोजाना हजारों की संख्या में चलती है। ऐसे में निजी बस मालिकों ने इस नियमों को लेकर विरोध जताना शुरू कर दिया है।
बस मालिकों का कहना है कि प्रदूषण में सबकी भागीदारी है, ऐसे में केवल बसों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। दिल्ली टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ने इस संबद्ध में उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम प्रदूषण के नाम पर बस मालिकों को बेरोजगार कर रही है।
उनका कहना है कि ऑल इंडिया परमिट वाली बीएस चार की बसों के मालिकों को इस संबंध में पहले सूचित नहीं किया और न ही किसी तरह की बैठक को बुलाया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि इस रोक का असर राजस्थान, उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा व पंजाब राज्यों के ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा। ऐसे में काम नहीं होगा तो घर का खर्च कैसे चलेगा। सम्राट ने कहा कि बीएस-चार डीजल की गाड़ियों को बेचकर बीएस-छह डीजल की बसें खरीदें इतना पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।