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नुगरा का तमाशा से की अंधविश्वास पर करारी चोट

Mon, 18 Apr 2016 09:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव

सार

  • कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से सभी का जीता दिल 
  • कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से सभी का जीता दिल
  • सेक्टर-29 के ओपन एयर थिएटर में हुआ आयोजन
  • मंच पर पहली बार हुआ ओपन माईक सेशन का आयोजन
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'नुगरा का तमाशा' नाटक के माध्यम से कला मंडली दिल्ली के कलाकारों द्वारा अंधविश्वास पर करारी चोट की गई। नाटक आयोजन नगर निगम की ओर से सेक्टर-29 स्थित ओपन एयर थिएटर में किया गया। 
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सुमन कुमार निर्देशित इस नाटक के माध्यम से बताया गया कि सांप हमारे मानस में, कुंडली में बैठा है, जो रहस्य और रोमांच से भरा बेहद लचीला, आकर्षक जीव है। यह न सिर्फ दुनिया के हर हिस्से में पाया जाता है, बल्कि हमारी लोकोक्तियों, मुहावरों, बिंबों, दंतकथाओं, महाकाव्यों, पौराणिक आयानों में हमारी स्मृतियों से भी पहले अस्तित्व में आया होगा।

नाटक नुगरा का तमाशा में पात्र अलबेला के इर्द गिर्द पूरी कहानी है। अंधविश्वास के कारण ही पांच वर्ष की आयु में उसकी शादी कर दी जाती है। ज्योतिष की सलाह के कारण अलबेला को 6 से 22 साल तक किसी स्त्री का चेहरा नहीं देखने दिया जाता। जिस सांप को वह कालबेलियों से बचाता है, वहीं सांप उसकी पत्नी की मिन्नतों के बाद भी नहीं मानता। आखिरकार एक सियार आकर न्याय करता है।
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ओपन एयर थिएटर के मंच पर इस शनिवार को पहली बार ओपन माईक सेशन का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित दर्शकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा अपनी रचनाएं मंच के माध्यम से प्रस्तुत की। दर्शकों ने इस नए सेशन की खूब सराहना की।

इस मौके पर नगर निगम के इंजीनियरिंग कंसलटेंट सीआर बिश्रोई, सांस्कृतिक सलाहकार विश्व दीपक त्रिखा, शिक्षाविद अर्जुन वशिष्ठ, समाजसेविका संगीता गुप्ता, वरिष्ठ रंगकर्मी महेश वशिष्ठ, मोहनकांत, प्रमोद मंगला, ईएस खुराना, अनिल जेटली सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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