दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को एचआईवी पॉजीटिव व्यक्ति को पर्याप्त चिकित्सा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उक्त व्यक्ति को बीमारी के कारण निजी अस्पताल ने नौकरी से हटा दिया है। इसके अलावा अदालत ने दिल्ली कानूनी सहायता बोर्ड को भी उक्त व्यक्ति के लिए कोई काम का पता करने का निर्देश दिया है।
दो बच्चों के 26 वर्षीय पिता ने यह याचिका दायर की है। याची का आरोप है कि अस्पताल की लैब में कार्य के दौरान उसे अचानक एचआईवी पॉजीटिव सुई लगने से रोग हो गया। इसके बाद अस्पताल ने उसे नौकरी से निकाल दिया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की खंडपीठ ने केंद्र के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में उक्त व्यक्ति को उचित चिकित्सा प्रदान की जाए।
अदालत ने दिल्ली कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सदस्य सचिव को भी निर्देश दिया है कि वह उक्त मामले की जांच करे और यह देखे कि क्या वह अपनी किसी भी योजना के तहत याची को नौकरी प्रदान कर सकता है या नहीं।
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, याची के कार्य करने वाले अस्पताल को नोटिस जारी कर 9 अगस्त तक मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि उनका मुवक्किल अनुबंध के आधार पर नौकरी कर रहा था और सिंगल जज ने उनकी याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि याची ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत था। ऐसे में वह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप नौकरी से हटाने को चुनौती नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा उनके मुवक्किल को अस्पताल में काम करते हुए यह बीमारी हुई है ऐसे में उसे नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। खंडपीठ ने कहा हम नहीं जानते कि हम किस हद तक कोई भी राहत देने में सक्षम होंगे या नहीं, लेकिन हम उसका उचित इलाज सुनिश्चित कर सकते हैं।