हाईकोर्ट ने कहा, हिंसा और दिल्ली को जलाने के मसले पर हुई बैठकों में शामिल थे मलिक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी सलीम मलिक को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मलिक उन बैठकों में शामिल हुए जहां हिंसा और दिल्ली को जलाने के मसलों पर खुलकर चर्चा की गई। अदालत ने रेखांकित किया कि एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में यह स्वीकार्य नहीं है। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने 22 अप्रैल के आदेश में कहा कि बैठक में वित्तपोषण, हथियारों की व्यवस्था, लोगों की हत्या के लिए पेट्रोल बम की खरीद और संपत्ति की आगजनी और क्षेत्र में लगे सीसीटीवी को नष्ट करने पर भी चर्चा हुई।
अदालत ने कहा, मौजूदा मामले में रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री है जो स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि अपीलकर्ता सह-साजिशकर्ता था और उसने अपराध किया है। इसके लिए उसके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया है। उच्च न्यायालय ने कहा, मामले के गुण-दोष पर अभिव्यक्ति और आरोपों पर फैसला करते समय निचली अदालत किसी भी तरह से ऊपर की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगी। मलिक को 25 जून 2020 को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार मलिक विघटनकारी चक्काजाम की एक पूर्व-निर्धारित साजिश का हिस्सा था और राजधानी में हिंसा और दंगों को बढ़ाने और भड़काने के लिए दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर एक पूर्व नियोजित विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था। ट्रायल कोर्ट ने अक्टूबर 2022 में मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जमानत देने से इन्कार करते हुए ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि उन्होंने षड्यंत्रकारी बैठकों में भाग लिया था।