अदालत ने गुरुवार को आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मुस्लिम युवाओं की भर्ती करके भारत में आपराधिक साजिश रचने के दोषी नफीस खान को एक अदालत से मिली 10 साल जेल और 1.03 लाख रुपये जुर्माने की सजा को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई की है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े एक आतंकी को देश में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए मिली 10 साल जेल की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते कहा है कि विचार करें अगर आईईडी फट जाता तो क्या होता, इसमें कितनी जानें जा सकतीं थी?
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा है कि दोषी मोहम्मद नफीस खान के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। आरोपी नफीस खान ने स्वीकार किया है कि देश में आतंक फैलाने के इरादे से आईईडी बना रहे थे। विचार हो अगर वे आईईडी फट जाते तो क्या होता, कितनी जानें जातीं? पीठ ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि नफीस पर लगे आरोप गंभीर हैं और अपने कृत्यों के लिए वह स्वयं जिम्मेदार है।
उच्च अदालत ने 16 अक्टूबर 2020 को आतंकी संगठन आईएसआईएस के सदस्य होने और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मुस्लिम युवाओं की भर्ती करके भारत में आपराधिक साजिश रचने के दोषी नफीस खान को एक अदालत से मिली 10 साल जेल और 1.03 लाख रुपये जुर्माने की सजा को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए यह कहा है। इस मामले में एक अदालत ने नफीस खान समेत 13 दोषियों को सजा सुनाई थी।
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राहत न मिलती देखकर नफीस के वकील प्रशांत प्रकाश और क्वासर खान ने सजा कम करने को लेकर प्रार्थना पत्र दिया। जिसको अनुमति देते हुए अदालत ने नफीस की माली हालत देखते हुए सजा के आदेश को बरकरार रखते हुए, उस पर लगाए गए जुर्माने को घटाकर आधा करने का आदेश दिया।