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दिल्ली: एसडीएमसी को वसंत विहार में सामाजिक विकलांगता ऑडिट ठीक से करने के निर्देश

Tue, 18 Jan 2022 08:12 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रत्येक नागरिक को राज्य द्वारा बनाए गए क्षेत्र में घूमने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि एसडीएमसी के अधिकारी व्हीलचेयर पर स्वतंत्र रूप से क्यों नहीं चल रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने सोमवार को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को वसंत विहार इलाके में सामाजिक विकलांगता ऑडिट को उचित तरीके से करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा एसडीएमसी के अधिकारी फुटपाथों की उपयोगिता की जांच करने के लिए व्हीलचेयर पर तो चले लेकिन बिना सहायता व स्वतंत्र रूप से नहीं। दरअसल अदालत ने पाया कि अधिकारी निरीक्षण के दौरान व्हीलचेयर पर बैठ कर उसे चलाने में अन्य की सहायता ले रहे थे।

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न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने यह आदेश अपने 15 नवंबर 2021 के आदेश से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए। अदालत ने कहा था कि फुटपाथों की उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए एसडीएमसी इंजीनियर बिना किसी सहायता प्राप्त व्हीलचेयर पर पूरी कॉलोनी के फुटपाथों को पार करेंगे।

अदालत ने एसडीएमसी के वकील से पूछा जब वे व्हीलचेयर में घूमते है तो क्या उन्हें यह मुश्किल लगता है? अधिवक्ता ने जवाब दिया नहीं बिल्कुल नहीं। इस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा उन्हें यह मुश्किल कैसे नहीं लगा। अदालत ने सवाल किया कि कोई दूसरा व्यक्ति व्हीलचेयर को पीछे से धक्का क्यों दे रहा है और कुर्सी पर बैठा अधिकारी उसे अपने आप नहीं हिला रहा है।
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अदालत ने कहा कि अगर व्हीलचेयर से चलने वाले लोगों को इस तरह से चलना पड़ता है तो एसडीएमसी को कॉलोनी में ऐसे प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक-एक अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी ताकि वे इन फुटपाथों पर चल सकें जो ठीक से नहीं बने हैं। अदालत ने निगम से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सामाजिक विकलांगता ऑडिट उचित तरीके से किया जाए।

रैंप एसडीएमसी के मानकों के अनुरूप क्यों नहीं
अदालत ने पूछा कि कई घरों के बाहर बने रैंप एसडीएमसी के मानकों के अनुरूप क्यों नहीं है। अधिकारियों से उन्हें हटाने के लिए कहा ताकि व्हीलचेयर या वॉकर पर लोगों के लिए कोई बाधा न हो। अदालत ने पेड़ों के कंक्रीटीकरण और फुटपाथों पर खड़ी कारों को हटाने से संबंधित मामले में एसडीएमसी, पीडब्ल्यूडी और दिल्ली पुलिस सहित अधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना की।

खुशी होती है कि सभी विभागों ने कमर कस ली
अदालत ने कहा यह देखकर खुशी होती है कि सभी विभागों ने कमर कस ली है और बहुत प्रगति की गई है। साथ ही अदालत ने दिल्ली पुलिस से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पैदल चलने के लिए बने फुटपाथों पर कारें खड़ी न हों। पुलिस ने तब अदालत को आश्वासन दिया कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और एक अनुपालन हलफनामा दायर किया जाएगा।

1,688 पेड़ों को डी-कंक्रीट किया गया
दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मोदी मिल से लेकर आउटर रिंग रोड और वसंत विहार रिहायशी इलाके में एयरपोर्ट तक नियमित रूप से पेड़ों को पानी देता और धोता रहा है। पेड़ों को डी-कंक्रीटाइजेशन का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि वसंत विहार क्षेत्र के 1,793 पेड़ों में से 1,688 को डी-कंक्रीट किया गया है और शेष 105 पेड़ों को डी-कंक्रीट करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।
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क्या व्हीलचेयर पर बैठने से गरिमा कम हो जाएगी-उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय ने पहले एसडीएमसी के अधिकारियों से व्हीलचेयर पर वसंत विहार के फुटपाथ पर उनकी उपयोगिता की जांच करने के लिए नहीं जाने के लिए सवाल किया था और पूछा था कि क्या व्हीलचेयर पर बैठने से उनकी गरिमा कम हो जाएगी। अदालत भावरीन कंधारी द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें आरोप लगाया गया है कि दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार में सैकड़ों पेड़ों के आसपास के क्षेत्र को कंक्रीट कर दिया गया है और उनके संरक्षण की मांग की गई है।
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