रैंप एसडीएमसी के मानकों के अनुरूप क्यों नहीं
अदालत ने पूछा कि कई घरों के बाहर बने रैंप एसडीएमसी के मानकों के अनुरूप क्यों नहीं है। अधिकारियों से उन्हें हटाने के लिए कहा ताकि व्हीलचेयर या वॉकर पर लोगों के लिए कोई बाधा न हो। अदालत ने पेड़ों के कंक्रीटीकरण और फुटपाथों पर खड़ी कारों को हटाने से संबंधित मामले में एसडीएमसी, पीडब्ल्यूडी और दिल्ली पुलिस सहित अधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना की।
खुशी होती है कि सभी विभागों ने कमर कस ली
अदालत ने कहा यह देखकर खुशी होती है कि सभी विभागों ने कमर कस ली है और बहुत प्रगति की गई है। साथ ही अदालत ने दिल्ली पुलिस से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पैदल चलने के लिए बने फुटपाथों पर कारें खड़ी न हों। पुलिस ने तब अदालत को आश्वासन दिया कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और एक अनुपालन हलफनामा दायर किया जाएगा।
1,688 पेड़ों को डी-कंक्रीट किया गया
दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मोदी मिल से लेकर आउटर रिंग रोड और वसंत विहार रिहायशी इलाके में एयरपोर्ट तक नियमित रूप से पेड़ों को पानी देता और धोता रहा है। पेड़ों को डी-कंक्रीटाइजेशन का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि वसंत विहार क्षेत्र के 1,793 पेड़ों में से 1,688 को डी-कंक्रीट किया गया है और शेष 105 पेड़ों को डी-कंक्रीट करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।
क्या व्हीलचेयर पर बैठने से गरिमा कम हो जाएगी-उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय ने पहले एसडीएमसी के अधिकारियों से व्हीलचेयर पर वसंत विहार के फुटपाथ पर उनकी उपयोगिता की जांच करने के लिए नहीं जाने के लिए सवाल किया था और पूछा था कि क्या व्हीलचेयर पर बैठने से उनकी गरिमा कम हो जाएगी। अदालत भावरीन कंधारी द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें आरोप लगाया गया है कि दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार में सैकड़ों पेड़ों के आसपास के क्षेत्र को कंक्रीट कर दिया गया है और उनके संरक्षण की मांग की गई है।