हरियाणा के किसानों को ध्यान में रख रेलवे ने नई पहल शुरू की है। दक्षिण भारत में बाजरे की खपत को देखते हुए इसे दक्षिण भारत के कई राज्यों में भेजना शुरू कर दिया है। किसानों को उनकी उपज देश के कोने-कोने तक भेजने में इस तरह से मदद कर रहा है। अभी तक हरियाणा के कई शहरों से 65,833 मीट्रिक टन बाजरा भेजा गया है।
छोटे, मध्यम से लेकर बड़े किसानों को अब अपनी उपज को कम से कम समय में भारत के कोने-कोने के बाजारों में भेज सकेंगे। रेलवे के इस पहल ने बाजरा किसानों को उच्च मांग वाले क्षेत्रों में अपनी उपज भेजने में मदद की है। अब तक दिल्ली रेल मंडल ने कैथल, झज्जर, रोहतक, गोहाना और पलवल सहित अन्य लदान स्थलों से 20 बीस रैकों का लदान किया है।
यानी 20 ट्रेन से बाजारा तमिलनाडु और कर्नाटक के विभिन्न गंतव्यों तक पहुंचाया गया है। 20 रैकों में कुल 65,833 मीट्रिक टन बाजारा भेजा गया। उल्लेखनीय है कि हरियाणा प्रदेश में बाजरे की खपत कम है। इसकी तुलना में पैदावार काफी अधिक है। पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी बाजरे की खेती अधिक होती है। रेलवे की इस मुहिम व पैदावार अधिक होने से किसानों अच्छा भाव मिल सकेगा।
छोटे किसान को पीसमील लोडिंग से बढ़ावा
छोटे किसानों को उनकी उपज की बिक्री के लिए पीसमील योजना लागू की गई है। इस तरह से रेलवे पीसमील लोडिंग को भी बढ़ावा दे रहा है ताकि छोटे या मंझोले किसान भी 5 से 10 वैगन की बुकिंग करके भी इस सुविधा का लाभ उठा सकें। इससे उन्हें अपनी उपज को किफायती और तेज गति से भेजने में मदद मिलेगी। पीसमील लदान की रेलवे की नीति अंतत: पूरे देश को कवर करते हुए रेलवे के राजस्व में वृद्धि लाएगी। दिल्ली रेल मंडल ने 11 अप्रैल को कैथल से तमिलनाडु के चावडिपलियाम के लिए बाजरा के पहले रैक के लदान की शुरुआत करके इसके परिवहन में एक नया मुकाम हासिल किया है।
दूर-दराज के लोगों तक की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में रेलवे का महकमा जुटा है। रेलवे का यह प्रयास देश के और अधिक किसानों को देश भर में अपने माल के परिवहन में रेलवे के साथ साझेदारी करने के लिए आकर्षित एवं प्रेरित कर रहा है। इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि रेलवे किसानों को खाद्यान्न परिवहन के लिए सक्रिय रूप से शामिल कर रहा है।
आशुतोष गंगल, महाप्रबंधक उत्तर रेलवे।