क्या एक हाथ वाले व्यक्ति की दस अंगुलियों के निशान लिए जा सकते हैं। गाजियाबाद पुलिस ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। पुलिस ने हत्या के एक मामले में दोषी राजबीर उर्फ छंगा के कथित शव के दोनों हाथों के निशान दिखा कर उसकी पहचान भी करवा दी।
यह कारनामा करने वाले तीन कांस्टेबलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है, इनमें से एक को निलंबित कर दिया गया है। गाजियाबाद और दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि जब तक यह पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं हो जाता कि शव राजबीर का था, तब तक उसके खिलाफ कार्यवाही को बंद नहीं किया जा सकता।
अदालत ने राजबीर के खिलाफ पुन: गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए दिल्ली और गाजियाबाद पुलिस को उसे ढूंढने का प्रयास जारी रखने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, अदालत ने लखनऊ स्थित फोरेंसिक लैब निदेशक को राजबीर और उसके परिवार से संबंधित डीएनए रिपोर्ट दो माह में पुलिस को सौंपने का आदेश भी दिया है।
खंडपीठ ने अदालत में उपस्थित गाजियाबाद के एसएसपी को निर्देश दिया कि वे दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के साथ राजबीर को भी ढूंढने के हर संभव प्रयास करें। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 अक्तूबर तय की है।
दिल्ली पुलिस ने रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि बरामद शव काफी खराब हालत में था और परिवार ने मात्र कपड़ों से पहचान की है। शव का बायां हाथ कटा हुआ था।
गाजियाबाद पुलिस के कांस्टेबल पप्पू सिंह ने शव के जो फिंगर प्रिंट लिए वह सभी दस अंगुलियों के थे और यह संभव नहीं है। इस मामले में जांच के बाद पप्पू सिंह केनिलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा परिवार के सदस्य अभी भी इसी बात पर अड़े हुए है कि शव राजबीर का था।
उधर, गाजियाबाद पुलिस ने माना कि शव के जो फिंगर प्रिंट लिए गए थे वे दूसरे शव के थे। ऐेसे में पप्पू सिंह के अलावा कांस्टेबल रणजीत सिंह और विपिन कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
इसके अलावा शव राजबीर का था या नहीं इस पता लगाने के लिए दोषी का दांत और परिवार के सदस्यों का ब्लड जांच के लिए लखनऊ फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।
ये था मामला
सीलमपुर में एक हत्या के मामले में राजबीर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। घोंडा निवासी राजबीर ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और अदालत ने अपील के निपटारे तक उसे जमानत प्रदान कर दी।
हाईकोर्ट में जब राजबीर की अपील पर सुनवाई तय हुई तो वह स्वयं या उनकी वकील पेश नहीं हुआ। अदालत ने राजबीर के वारंट जारी कर दिए।
गाजियाबाद पुलिस ने वारंट पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि 8 नवंबर नवंबर 13 को गंगनहर से एक शव मिला था और 10 नवंबर को राजबीर के परिवार के सदस्यों ने उसके कपड़ाें से पहचान की थी। ऐसे में अपील पर सुनवाई बंद कर दी जाए। अदालत ने पूरे मामले पर संदेह जाहिर करते हुए जांच का आदेश दिया।