आईटी, बीपीओ के लिए पूरी दुनिया में मशहूर गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करने का मुद्दा सात समंदर पार भी उठ रहा है। इंडस्ट्रियल, कॉमर्शियल और टेक्नॉलोजी हब की वजह से इंग्लैंड और अमेरिका के अखबारों ने भी इसे उठाया है। नाम बदले जाने पर अखबारों ने लोगों के ट्विटर पर आए बयानों के माध्यम से चुटकी ली है। अमेरिका के वॉल स्ट्रीट जनरल ने लिखा है गुडबाय गुड़गांव।
पत्र ने गुड़गांव के एक साइन बोर्ड के साथ स्टोरी छापी है। इसमें महाभारत काल से गुड़गांव गांव के जुड़ाव की कहानी भी बताई गई है। कौरवों, पांडवों और उन्हें धनुष विद्या सिखाने वाले गुरु द्रोणाचार्य के बारे में भी बताया गया है।
गुरुग्राम का अर्थ बताते हुए लिखा है कि द विलेज ऑफ द गुरु। इसमें गुड़गांव के एक छोटे से गांव से कॉमर्शियल हब में बदलने की सक्सेस स्टोरी भी बताई गई है। अब यहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां और मॉल्स व होटल हैं।
पत्र ने गुरुग्राम नाम पर कटाक्ष करते हुए चार चुनिंदा ट्वीट भी दिए हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि भारत के किन-किन शहरों के नाम बदल चुके हैं। बीबीसी ने भी नाम बदलने पर ट्विटर पर लोगों द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं को आधार बनाते हुए हेडिंग दी है कि भारतीय सोशल मीडिया बिजनेस सिटी गुड़गांव का नाम बदलने को लेकर मजाक उड़ा रहा है।
इसने गुड़गांव को मल्टीनेशनल कंपनियों का घर बताते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साफ-सफाई का मुद्दा उठाया है। साथ ही एक व्यक्ति का ट्वीट दिया है जिसमें नाम गुरुग्राम करने के बाद चुटकी ली गई है कि शहर अगले साल का ग्रैमी अवार्ड जीतने के लिए आश्वस्त है।
इंग्लैंड के मेल ऑनलाइन (डेली मेल) ने लिखा है कि स्थानीय हिंदू राष्ट्रवादी सरकार ने गुड़गांव का नाम बदल दिया है। गुड़गांव की तरक्की की तारीफ करते हुए लिखा गया है कि भारत के कई शहरों के नाम स्थानीय भाषा और राष्ट्रवादी भावनाओं को देखते हुए बदले गए हैं।
गुड़गांव नो मोर
देश-विदेश के अखबारों में नाम बदलने को लेकर खूब खबरें छपी हैं। बिजनेस अखबारों ने कारपोरेट लॉबी की बात उठाई है। इसे लेकर अखबारों और उनकी वेबसाइट ने अच्छी हेडिंग दी है। एक समाचार पत्र ने 'गुड़गांव नो मोर लिखा है।
एक ने लिखा वेलकम टू गुरुग्राम। वैसे गुड़गांव का नाम बदला भले ही गया है लेकिन यह कुल मिलाकर पांच नामों से जाना जाता है। इसे लोग गुड़गांव, गुड़गांवा, गुरुग्राम, साइबर सिटी, मिलेनियम सिटी कहकर पुकारते हैं।
सात साल लगे थे बंगलौर से बंगलूरू बनने में
आजादी के बाद से अब तक शहरों के नाम बदलने का सिलसिला चल रहा है। नाम बदलने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है। केंद्र सरकार ने 1956 में स्टेट्स रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट के तहत नाम बदलने की शुरुआत की। बताया जाता है कि बंगलौर का नाम बंगलूरू करने में करीब सात साल लग गए।
नाम बदलने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया, पोस्टल डिपार्टमेंट, गृह, रेल, साइंस एंड टेक्नॉलोजी एवं इंटेलीजेंस ब्यूरो की सहमति लेनी पड़ेगी। गुड़गांव का नाम गुरुग्राम करने को लेकर 6 अगस्त 2014 को नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखा गया था।
उसी दिन पार्षदों ने इसे पास कर सरकार के पास भेजा था। शिक्षाविद् अशोक दिवाकर के मुताबिक केंद्र में भी भाजपा की सरकार है, इसलिए गुड़गांव का नाम गुरुग्राम करवाने में अड़चन नहीं आएगी।
इन शहरों के बदल चुके हैं नाम
-मुंबई, कोलकाता, बड़ोदरा, तिरुअनंतपुरम, पुणे, चेन्नई, बंगलूरू, ओडिसा, पुद्दुचेरी, वाराणसी आदि।