पीड़ितों की ओर से मोहम्मद इस्माइल व साजदा पत्नी जुनैद की तरफ से एडवोकेट नसरु खान कामां और एडवोकेट यूसूफ खान फिरोजपुर झिरका ने पक्ष रखा। अदालत ने दोपहर तक फैसला सुरक्षित किया। राजस्थान सरकार की ओर से नियुक्त अधिवक्ता गैरहाजिर रहे। इससे पहले आरोपी मोनू मानेसर के वकील कुलभूषण भारद्वाज और एलएन पाराशर ने अदालत को बताया कि इस हत्याकांड से मोहित उर्फ मोनू का कोई लेना देना नहीं है। उसे जानबूझकर फंसाया गया है, इसलिए उसे जमानत दी जाए, ताकि वह आगे अपनी पैरवी भी कर सके। इस दलील पर फैसला दोपहर तक सुरक्षित जरूर रखा गया, लेकिन बाद में जमानत नामंजूर कर दी गई।
पुलिस के अधिवक्ता ने मोहित उर्फ मोनू पर हत्या की साजिश में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया और अदालत को बताया कि एफआईआर में आईपीसी की धारा 120बी जोड़ी गई है, इसलिए आरोपी को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
आरोपी मोहित उर्फ मोनू मानेसर के अधिवक्ता कुलभूषण भारद्वाज ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय में जमानत के लिए जल्दी ही याचिका दायर की जाएगी। वहीं तीन अन्य आरोपी राजवीर, दीपक मतलोडा और आचार्य योगेंद्र द्वारा अग्रिम जमानत के लिए लगाई गई याचिकाएं वापस ले ली गई।
बता दें कि 12 सितंबर को मोहित उर्फ मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस ने नूंह हिंसा में गुरुग्राम के मानेसर से गिरफ्तार किया था। अदालत में पेशी के दौरान राजस्थान पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गई थी जहां उसे भरतपुर की सेवर जेल रखा गया था। लेकिन जान के खतरे को देखते हुए 22 सितंबर को मोनू को हाईटेक अजमेर जेल शिफ्ट किया गया था।