गुरुग्राम। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के आदेशों को नजरअंदाज करना द्वारका एक्सप्रेस वे की निर्माणकर्ता कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (एलएंडटी) को आर्थिक रूप से भारी पड़ गया। एनएचएआई ने अपनी हिदायत के अनुसार कंपनी की भुगतान राशि में से 6.67 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना काट लिया। एनएचएआई ने करीब डेढ़ महीने पहले ही कंपनी को तय समय में जुर्माना न भरने की सूरत में यह कदम उठाने की हिदायत दे दी थी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक, निरमान जंबूलकर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हमने पहले ही चेता दिया था, लेकिन कंपनी ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि भुगतान में से जुर्माना वसूलने के लिए कंपनी ने अपनी सहमति जताई थी। कंपनी की सहमति के बाद ही यह कदम उठाया गया है।
काबिले गौर है कि पिछले साल 28 मार्च को द्वारका एक्सप्रेस वे के हरियाणा के हिस्से (गुरुग्राम) में दौलताबाद के पास 107-109 पिलर के बीच दो स्लैब गिर गई थीं। दुर्घटना में तीन श्रमिक घायल हुए थे। एनएचएआई की जांच में कंपनी को गुणवत्ता से समझौता करने, लापरवाही और गलत डिजाइन का दोषी पाया गया था। जांच के बाद 16 मार्च को एनएचएआई की ओर से कंपनी पर 6.67 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया था। साथ ही एक सप्ताह में जुर्माना राशि जमा करने का निर्देश भी दिया था। तय समय में जुर्माना राशि नहीं भरने की सूरत में कंपनी के भुगतान में से जुर्माना वसूलने की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बाद एनएचएआई की ओर से निश्चित अंतराल में कंपनी को दो बार नोटिस भी भेजा गया, लेकिन एलएंडटी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।