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भीषण गर्मी के बीच बदहाल सरकारी व्यवस्था में पिस रहे मरीज

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गुरुग्राम। एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के बीच मरीज बेहतर इलाज के लिए जूझ रहे हैं। साइबर सिटी के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों के लिए पंखे व बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में मरीज अस्पताल की फर्श पर लेट जाते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
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उस पर भी पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों को न होने पर दोपहर बाद तो ऐसा समय आता है जब ओपीडी में पहले प्रवेश करने के लिए मरीज आपस में ही भिड़ने लगते हैं। कहीं देर न हो जाए और ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने के लिए बारी ही न आए। इन सबके बीच मरीजों की व्यथा को समझने वाला कोई नहीं है। शनिवार को सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जो बदहाल सरकारी व्यवस्था का आकलन करने के लिए काफी था।
समय से पहले डॉक्टर नदारद
सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल मेें सप्ताह के अंतिम कार्यदिवस पर अस्पताल प्रबंधन के नियमों के उलट डॉक्टरों की अपनी ही मर्जी चलती है। ओपीडी का समय दोपहर 2 बजे तक का है लेकिन डॉक्टर 1 बजे ही अपने कक्ष से नदारद हो जाते हैं। शनिवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां स्किन ओपीडी में डॉ. नीरज मेहता के न होने पर त्वचा संबंधी समस्या लेकर आए एक मरीज को खाली हाथ लौटना पड़ा। उस समय दोपहर के करीब 1 ही बज रहे थे लेकिन डॉक्टर नदारद थे। इसके अलावा बेसमेंट में संचालित अधिकांश विभागों से डॉक्टर नदारद रहे।
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ओपीडी में जाने के लिए मशक्कत
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सक भी नहीं हैं। नतीजा यह है कि इन दिनों सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक मरीजों की भीड़ लगी रहती है। खास तौर पर मेडिसिन ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। यहां चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की दरकार है। दोपहर बाद शनिवार को करीब एक बजे मरीज डॉक्टर को दिखाने के लिए मशक्कत करने लगे और पहले जाने के लिए गेट पर खड़े सुरक्षाकर्मी से भी उलझते नजर आए। मरीजों ने कहा कि भीषण गर्मी व बीमारी को देखते हुए एक और जनरल ओपीडी चलनी चाहिए।
पंखों तक की व्यवस्था नहीं
इतना ही नहीं बदहाली का आलम यह है कि सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में पर्याप्त संख्या में पंखे तक नहीं हैं। शनिवार को भी गर्मी से परेशान अधिकांश मरीज ओपीडी रजिस्ट्रेशन कार्ड से ही पंखा करते नजर आए। ये समस्या कोई नई नहीं है बल्कि पिछले कई वर्षों से पंखे लगाने की दरकार है लेकिन शासन-प्रशासन को कोई परवाह नहीं है।
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त्वचा संबंधी समस्या थी। जांच रिपोर्ट लेकर आया हूं लेकिन डॉक्टर का कोई पता नहीं है।
- बलविंदर
पिछले करीब 45 मिनट से कतार में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हूं। पता नहीं कब बारी आएगी।
- नैना
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