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मुख्यमंत्री के साथ किसानों की बैठक बेनतीजा

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गुरुग्राम। जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे मानेसर क्षेत्र के किसानों की मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ बैठक बेनतीजा रही। अधिग्रहण रद्द होने पर आम सहमति नहीं बन पाई। निश्चित ही आने वालों में दिनों में किसान और सरकार के बीच ज्यादा टकराव बढ़ने की नई आशंका ने जन्म ले लिया है। अब किसान आगे की रणनीति बनाकर नए सिरे से आंदोलन शुरू करेंगे। इसके तहत कानूनी लड़ाई के लिए हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया जाएगा और सड़क, रेलवे लाइन ठप करने जैसे कदम उठाने से भी किसान नहीं हिचकेंगे। बैठक में किसी तरह का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने से खफा किसान नेताओं ने ऐलान कर दिया है कि अब आर-पार की जंग होगी। किसान जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं।
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तय कार्यक्रम के अनुसार किसानों का एक दल सुबह चंडीगढ़ पहुंचा। इस दल में जमीन बचाओ, किसान बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं खोह गांव सरपंच रोहतास सिंह, कासन गांव के सरपंच सत्यदेव शर्मा, मोकलवास से एडवोकेट प्रदीप यादव, बास लांबी से थानेदार रोशन लाल, खोह गांव के नरदेव यादव, नरसिंह चौहान, कासन के एडवोकेट विनोद चौहान, राजू मानेसर, हेमचंद कुकडौला, महेश कासन सहित 16 लोग शामिल थे। 12:30 बजे मुख्यमंत्री आवास संत कबीर कुटीर में पहुंचे । वहां किसानों की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। इस बीच उपायुक्त निशांत कुमार यादव और हरियाणा राज्य औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के प्रबंध निदेशक प्तविकता गुप्ता पहले ही मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए थे। बैठक में शामिल सदस्यों के अनुसार मुख्यमंत्री ने अधिग्रहण रद्द करने से साफ मना कर दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ते कर्ज का हवाला दिया। इन लोगों ने एतराज जताया तो मुख्यमंत्री ने साफ कह दिया कि इसके अलावा सरकार के पास कोई चारा नहीं है। हालांकि किसानों की ओर से मुख्यमंत्री को हर तरह की दलील दी गई, लेकिन मुख्यमंत्री ने जमीन अधिग्रहण रद्द करने से साफ इनकार कर दिया।
मुआवजे को लेकर भी तकरार
जमीन अधिग्रहण के साथ ही इसके मुआवजे को लेकर भी तकरार नजर आ रही है। इन लोगों के अनुसार भूमि अधिग्रहण का मुआवजा साल 2011 के नियम के तहत ही दिया जा रहा है। इसके तहत प्रति एकड़ 55 लाख रुपये बेस प्राइस, इसका 30 फीसदी सोलेटियम (किसान उन्नति के लिए विशेष अनुदान) और 12 फीसदी के हिसाब से 36 महीने यानी तीन साल का ब्याज देने पर सरकार सहमत है। इन लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की जमीन भी ले रही है और उनका गला भी घोंट रही है, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं है। किसानों ने कहा कि अब धरनास्थल पर किसानों के साथ चर्चा की जाएगी, तभी कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। सबकी सहमति लेकर आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। इन लोगों ने साफ कहा कि किसान किसी भी भय या दबाव में झुकेंगे नहीं।
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