गुरुग्राम। किसान आंदोलन के समर्थन में शहर के राजीव चौक के पास संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम द्वारा धरना दिया जा रहा है। बृहस्पतिवार को धरनास्थल पर किसान संसद का आयोजन दोपहर 12 से 3 बजे तक किया गया। किसान संसद में कृषि कानूनों एवं एमएसपी की गारंटी के कानून पर चर्चा एवं बहस हुई। किसान संसद में एक-एक घंटे के तीन सत्र हुए। प्रथम सत्र में किसान ईश्वर सिंह को अध्यक्ष, ऊषा सरोहा को उपाध्यक्ष चुना तथा मनीष मक्कड़ को कोऑर्डिनेटर बनाया गया। दूसरे सत्र में योगेश्वर दहिया को अध्यक्ष, डॉ. सारिका वर्मा को उपाध्यक्ष चुना और तीसरे सत्र में अनिल पवार को अध्यक्ष एवं बलवान सिंह दहिया को उपाध्यक्ष चुना गया।
किसान संसद में सभी सदस्यों ने बहस के दौरान कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है। सरकार ने तीनों काले कानूनों से पूंजीपतियों पर लगे प्रतिबंध हटाए हैं और पूंजीपतियों को बिचौलियों की बड़ी भूमिका दी है। अब पूंजीपति खाद्य वस्तुओं मनमानी स्टाक कर सकते हैं, क्योंकि सरकार ने पूंजीपतियों को जमाखोरी की छूट दे दी है। किसानों ने कहा कि पूंजीपति किसानों से 10 रुपये किलो मटर खरीदते हैं और उसी मटर को प्रोसेस करके 200 रुपये में बेचते हैं। इससे उत्पादक किसान तथा उपभोक्ता आम आदमी दोनों लुटते हैं। इन कानूनों से सिर्फ पूंजीपति कॉर्पोरेट घरानों की आय कई गुना बढ़ जाएगी। पूंजीपति पूरी तरह से बाजार पर कब्जा कर लेंगे और बाजारों को अपने हिसाब से चलाएंगे और देश में महंगाई बढ़ेगी। संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष संतोख सिंह ने कहा कि तीनों काले कानूनों से किसान, मजदूर, गरीब तथा आम आदमी का शोषण होगा और यह आम आदमी के डेथ वारंट हैं। ऐसे में तीनों काले कानूनों को रद्द किया जाए। किसान संसद के दौरान सभी किसानों ने तीनों काले कानून रद्द करो के नारे लगाए।
बहस के बाद किसान संसद ने तीनों काले कानूनों को सर्वसम्मति से रद्द कर दिया। बहस के बाद किसान संसद में सभी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया कि एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए तथा इसका प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जाएगा कि सरकार जनहित में इन तीनों काले कानूनों को रद्द कर दे। किसान संसद का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। किसान संसद में फूल सिंह, सतबीर सिंह, विनोद कुमार भारद्वाज, विजय, कंवर लाल, सतीश, मुकेश डागर, विरेन्द्र हुड्डा, मनोज, अटलवीर कटारिया, श्रवण कुमार, कमांडेंट सत्यवीर सिंह, गीता गौरैया, देवीका सिवाच सहित काफी संख्या में किसान व अन्य संगठनों के सदस्य शामिल रहे।