गुरुग्राम। कपड़ा बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले धागे के दामों में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी होने से टेक्सटाइल उद्योग पर असर पड़ रहा है। हालांकि कोरोना काल के हालात सुधरने से मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन यहां के उत्पाद की लागत वैश्विक बाजार में मिलने वाली कीमतों के मुकाबले ज्यादा है। जिस कारण दूसरे देशों से गुरुग्राम के उद्योगों को ऑर्डर मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। क्योंकि बांग्लादेश सहित अन्य कई देशों में भारत की अपेक्षा कम कीमत पर तैयार माल मिलने से कई देशों के व्यापारियों द्वारा वहां पर ऑर्डर दिए जा रहे हैं। धागों व कच्चे माल की कीमत बढ़ने से गुरुग्राम के टेक्सटाइल उद्योगों पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कपड़े व्यापार से जुड़े उद्योगपतियों का कहना है कि कच्चे माल के दाम 50 फीसदी बढ़ने से काफी परेशानी आ रही है, क्योंकि तैयार माल महंगा होने के कारण दूसरे देशों में एक्सपोर्ट पर काफी असर पड़ा है। तैयार माल के दाम महंगे होने के कारण दूसरे देशों से ऑर्डर में भी कमी आई है। उन्होंने बताया कि पहले 30 सिंगल कॉटन धागा 205 से 210 के रेट पर मिलता था, जोकि वर्तमान में 303 से 310 रुपये के रेट पर मिल रहा है। वहीं 40 सिंगल कॉटन धागा 220 रुपये मिलता था, जोकि अब 340 रुपये तक मिल रहा है। वहीं धागों व कच्चे माल के दाम सप्ताह दर सप्ताह बढ़ते जा रहे हैं। अगर अब ऑर्डर लेते हैं तो वर्तमान के कच्चे माल के दामों के हिसाब से पूरे ऑर्डर की राशि तय होती है, लेकिन अगले सप्ताह तक कच्चे माल के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे ऑर्डर को पूरा करने में व्यापारी को नुकसान हो जाता है।
वैश्विक बाजार में मिलने वाली कीमतों की बजाए देश में धागों व कच्चे माल के दामों में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई। ऐसे में उत्पादन में लागत बढ़ रही है। जबकि दूसरे देशों से ऑर्डर वैश्विक बाजार की कीमतों हिसाब से मिल रहे हैं। ऐसे में उद्योगपतियों को मुनाफा न कमाकर ही ऑर्डर पूरे करने पड़ रहे हैं, ताकि उनका उद्योग चलता रहे। अगर ऑर्डर नहीं लेंगे तो कामकाज ठप हो जाएगा।
- रमनदीप सिंह, वरिष्ठ उपप्रधान, फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री, गुरुग्राम।
हर सप्ताह धागों के दाम बढ़ने से ऑर्डर पूरे करने में नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि बांग्लादेश सहित अन्य देशों में धागों की कीमत कम होने के कारण विदेशी व्यापारियों द्वारा वहां पर ऑर्डर दिए जा रहे हैं। कपड़ा उद्योगों को नुकसान से बचाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे और धागों एवं कच्चे माल के दाम निर्धारित करने होंगे, ताकि उत्पादन लागत ज्यादा न आए।
- सौरभ जुनेजा, सह सचिव, फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री, गुरुग्राम।