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विदेशियों को ठगने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 24 गिरफ्तार

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गुरुग्राम। डीएलएफ फेज-2 में किराये के मकान में ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे एक फर्जी कॉलसेंटर का मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने पुलिस के साथ मिलकर भंडाफोड़ किया है। मौके से संचालक समेत 14 युवक और 10 युवतियों को गिरफ्तार किया गया है। कॉल सेंटर से अमेरिका और कनाडा के लोगों को डरा धमका कर वसूली व सिस्टम सपोर्ट देने के नाम पर ठगी की जा रही थी। आरोपियों के पास से ढाई लाख रुपये, कंप्यूटर, मोबाइल आदि बरामद हुए हैं। आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ जारी है।
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एसीपी क्राइम प्रीतपाल सांगवान ने बताया कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम को 25 मार्च की रात को सूचना मिली थी कि डीएलएफ फेज-2 के एम ब्लॉक की गली नंबर-11 के प्लॉट संख्या-9 में ग्राउंड फ्लोर पर उमेश यादव उर्फ ओम्मी, माणिक और एसस्ले नाम का व्यक्ति एक फर्जी कॉल सेंटर चला रहे हैं। ये लोग कंप्यूटर से वॉइस मेल और पॉपअप भेजकर सिस्टम सपोर्ट देने के नाम पर ठगी करते थे। इसके साथ ही खुद को कनाडा और अमेरिका की सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डरा धमकाकर वसूली करते हैं।
डीएसपी मुख्यमंत्री उड़नदस्ता इंद्रजीत, एसीपी डीएलएफ संजीव बल्हारा ने पुलिस टीम के साथ मिलकर छापा मारा। मौके पर मौजूद कॉल सेंटर संचालक गुरुग्राम के सेक्टर-7 निवासी उमेश यादव से लाइसेंस, कंपनी का रजिस्ट्रेशन समेत अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कुछ नहीं दिखा सका। पुलिस ने संचालक समेत 14 युवक और 10 युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी के खिलाफ डीएलएफ फेज-2 थाने में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी, रुपये वसूलने की रिपोर्ट दर्ज हुई है। इन सभी को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। अब रिमांड पर लेकर आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
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सरकारी अधिकारी बताकर झूठे केस में फंसाने के लिए डराते थे
गुरुग्राम। कॉल सेंटर संचालक उमेश ने पूछताछ में बताया कि वह 12वीं पास है। पहले वह दिल्ली के एक कॉल सेंटर में काम करता था। ज्यादा पैसे कमाने की चाह में गुरुग्राम पहुंचा और यहां पर अपना कॉल सेंटर खोल दिया। छह महीने से वह यहां कॉल सेंटर चला रहा था। वह अमेरिका और कनाडा के लोगों को मेल से सिस्टम में खराबी होने की जानकारी देते थे। मेल में ही सिस्टम को सही कराने के लिए कॉल सेंटर का नंबर देते थे। कॉल आने पर खुद को माइक्रोसॉफ्ट का कर्मचारी बताकर सिस्टम सपोर्ट के नाम पर कंप्यूटर हैक कर डॉलर ऐंठते थे। इसके साथ ही कनाडा के नागरिकों को कॉल कर खुद को वहां की सरकारी एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताते थे। ठग वहां के लोगों का सोशल इंश्योरेंस नंबर (एसआईएन) नंबर लेकर उन्हें मादक पदार्थ की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे होने की झूठी बात कहकर डराते धमकाते थे। इसके बाद गिरफ्तारी वारंट निरस्त कराने की बात कहकर पांच सौ से एक हजार डॉलर तक गिफ्ट कार्ड के रूप में लेते थे जिसे बाद में कैश कराया जाता था। एसीपी क्राइम ने बताया कि वारदात का रिकॉर्ड, ठगी और वसूली गई राशि, बैंक खातों की जानकारी, विदेशी नंबर कहां से उपलब्ध होते थे इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। गिफ्ट कार्ड को कैश कराने के तरीके की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
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