वन रैंक वन पेंशन के लागू होने से दो-तीन तरह के आर्थिक बोझ सामने आएंगे हालांकि भारत सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक आकड़ा अभी पेश नहीं किया है।
कुछ लोग इसे वन टाइम आठ हज़ार करोड़ का बोझ बता रहे हैं, तो कोई इसे 10 और 12 हज़ार करोड़ का बोझ बता रहा है। लेकिन भविष्य में वेतन आयोग के लागू आने के बाद हर साल ये रक़म बढ़कर नौ से 10 हज़ार करोड़ भी हो सकती है।
इसलिए इसे लेकर अभी स्पष्टता नहीं आई है। दूसरे लोग भी इसकी मांग कर सकते हैं। रेलवे यूनियनों ने भी वन रैंक वन पेंशन की मांग शुरू कर दी है।
पुलिस और सीआरपीएफ़ वाले भी यह मांग कर सकते हैं इसलिए सरकारी ख़ज़ाने पर यह बोझ बहुत अधिक हो सकता है।