उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जगह-जगह सड़कों पर फैले कूड़े-कचरे का तय पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप कलेक्शन और डिस्पोजल न करना स्थानीय प्रशासन को महंगा पड़ा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश सरकार, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और नगर निगम समेत संबंधित एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
बेंच ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति सड़कों पर, नदी किनारों और हिंडन कैनाल में कूड़ा कचरा फेंकता पाया जाता है तो उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए। जीडीए और निगम तत्काल पूरे शहर में निर्धारित जगहों पर कूड़ेदान की व्यवस्था करे।
जुर्मान नहीं भरे तो यहां बताएं
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली प्रधान पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि कोई जुर्माना भरने से मना करता है तो उसकी जानकारी बेंच के सामने पेश की जाए।
ट्रिब्यूनल के समक्ष गाजियाबाद डीएम, नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर व अन्य अधिकारी भी पेश हुए। बेंच ने पूछा कि नदियों के किनारों पर और हिंडन कैनाल में कूड़ा-कचरा कैसे फैला हुआ है? अब तक ट्रिब्यूनल के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?
इस पर निगम और प्राधिकरण के काउंसिल ने कहा कि स्थानीय निवासियों के जरिये कूड़ा-कचरा फैलाया जाता है और हम इसे हटाते हैं। बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर निगम ने अब तक कूड़ा-कचरा फेंकने वालों पर क्या कार्रवाई की है।
कोई कार्रवाई की गई तो बेंच के सामने दस्तावेज पेश करें। इस पर काउंसिल खामोश रही। बेंच ने कहा कि आप खुले वातावरण में बिना मानकों को अपनाए वेस्ट जलाते हैं बताइए जुर्माना क्यों न लगाया जाए। बीते दो माह से आप लोगों ने ट्रिब्यूनल के आदेश के बावजूद कोई काम नहीं किया है।
आदेश का पालन नहीं कराया तो कटेगी इनकी सैलरी
ग्रीन बेंच के सामने गाजियाबाद और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश काउंसिल ने कहा कि गाजियाबाद में रोजाना कूड़े-कचरे और अन्य वेस्ट को प्रताप विहार में डंप किया जा रहा है।
इस पर बेंच ने पूछा कि क्या आपने प्रताप विहार में एमएसडब्ल्यू प्लांट के जगह की पहचान की है? क्या वेस्ट निर्धारित मानकों के अनुरूप डंप किया जा रहा है। पहले काउंसिल ने गोलमोल जवाब दिया फिर झूठ बोलने की कोशिश की। इस पर ग्रीन पैनल ने जमकर खिंचाई की।
एनजीटी ने गाजियाबाद डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से कहा कि वे जल्द से जल्द आदेश का पालन करें नहीं तो एक माह की सैलरी काट ली जाएगी। वहीं, बेंच ने सभी संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर कहा कि समूचे गाजियाबाद में एमएसडब्ल्यू के निस्तारण को लेकर रोडमैप ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करें। यह राज्य का कर्तव्य है कि वे इन कामों को सुनिश्चित करवाए।