गाजियाबाद। इस बार चुनाव में गाजियाबाद की तीन विधानसभाओं पर बागी प्रत्याशी राजनीतिक दलों के समीकरण को झटका दे सकते हैं। विशेष रूप से साहिबाबाद, मुरादनगर और मोदीनगर सीट से बागियों के सिर उठाने की आशंकाएं सपा, बसपा और भाजपा को अभी से नजर आने लगी हैं।
लगभग निश्चित हो चुका सपा, कांग्रेस का गठबंधन और भाजपा की चुप्पी साहिबाबाद विधानसभा सीट पर बागियों को हवा दे सकती है। अमरपाल शर्मा के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि साहिबाबाद से कांग्रेस अब अपने प्रत्याशी को उतारेगी।
उधर सपा इस सीट से पहले ही विरेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। विरेंद्र अपना नामांकन फार्म भी कलक्ट्रेट से ले जा चुके हैं। गठबंधन के बाद अगर यह सीट कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में गई तो विरेंद्र को पीछे हटना पडे़गा।
ऐसे में उनके अपने समर्थक पार्टी से नाराज हो सकते हैं। उधर अमरपाल शर्मा के कांग्रेस में अचानक आने और टिकट पा जाने से भी कई कांग्रेसियों को तगड़ा झटका लग सकता है और वह बागी तेवर दिखा सकते हैं।
साहिबाबाद से भाजपा के टिकट की दौड़ में शामिल रहे डा. अनिल राघव तो मंगलवार को ही कलक्ट्रेट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन फार्म ले जा चुके हैं। मुरादनगर और मोदीनगर से भी एक राजनीतिक दल के घोषित प्रत्याशियों को गठबंधन का दंश झेलना पड़ सकता है।
पार्टी जहां एक सीट पर प्रत्याशी बदलने के मूड में है, वहीं दूसरी पर असर तब पडे़गा जब सपा-कांग्रेस गठबंधन में रालोद भी जुड़ जाएगा। इस सीट पर रालोद अपनी दावेदारी पेश करेगा और वहां से वह प्रत्याशी भी पूर्व में ही घोषित कर चुका है। ऐसे में एक प्रत्याशी को पीछे हटना पडे़गा। अगर ऐसा होता है तो इन प्रत्याशी के समर्थक भी बागी की भूमिका निभा सकते हैं।
गठबंधन को लेकर सपा-रालोद नेताओं में बेचैनी
मोदीनगर। विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद के संभावित गठबंधन को लेकर बुधवार को दिनभर दोनों दलों के नेताओं में बेचैनी का माहौल रहा। टिकट के दावेदारों ने दिल्ली में अपने आकाओं के पास डेरा डाल रखा है। खासतौर से मोदीनगर विधानसभा में इस संभावित गठबंधन को लेकर दो खेेेमों में अफरातफरी का माहौल है।
मोदीनगर और मुरादनगर विधानसभा सीट पर बसपा और भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। मोदीनगर में भाजपा से डा. मंजू शिवाच और बसपा से वहाब चौधरी घोषित हैं। सपा की पिछले दिनों जारी हुई दोनों सूचियों में रामआसरे शर्मा का नाम है, लेकिन रालोद, कांग्रेस और सपा के संभावित गठबंधन में यह सीट किसके खाते में जाएगी, यह तय नहीं है।
इस सीट पर वर्तमान में रालोद के सुदेश शर्मा विधायक हैं और उनकी दावेदारी भी पहले से ही है। वहीं कांग्रेस से भी कई उम्मीदवार टिकट की दौड़ में हैं। मोदीनगर विधानसभा सीट जीतने में जाट और मुस्लिम वोटों का अहम रोल है। दोनों के बराबर 45-45 हजार वोटर हैं। ऐसे में संभावना है कि सपा और रालोद दोनों ही दल इसे अपने खाते में रखने का प्रयास करेंगे।
ऐसे ही हालात मुरादनगर विधानसभा में भी हैं। इस सीट पर रालोद और सपा के साथ कांग्रेस के नेता भी टिकट में दौड़ में शामिल हैं। ऐसे में दोनों सीटों से टिकट के दावेदार और सपा से घोषित हो चुके प्रत्याशियों की नजरें अब महा गठबंधन पर हैं।
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