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पानी में जहर, सांसें न ठहर जाएं

Sat, 09 Apr 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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कुएं के पानी से नहाने के लिए मारामारी - फोटो : getty
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एक दशक पहले तक एनसीआर के ज्यादातर जनपदों में ग्राउंड वाटर मीठा और शुद्ध था, मगर पिछले कुछ वर्षों से इसकी गुणवत्ता खराब हुई है। वेस्ट यूपी में गाजियाबाद की बात की जाए तो यहां का ग्राउंड वाटर सबसे ज्यादा खराब हुआ है।
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शुद्ध पानी की मांग को लेकर लगातार आंदोलन-प्रदर्शन होने केबावजूद लोगों के हाथ कुछ नहीं लगता। केवल ग्राउंड वाटर ही नहीं, निगम की सप्लाई के ज्यादातर सैंपल भी जांच में फेल पाए गए हैं। अब एनजीटी ने दोबारा से यहां के पानी की जांच कराने के आदेश दिए हैं तो लोगों को शुद्ध पानी मिलने की उम्मीद जगी है।

हाल एक- शहर
ज्यादातर क्षेत्रों का पानी जहरीला हो गया है। उद्योगों के केमिकल ग्राउंड वाटर में मिल रहे हैं। सबसे पहले लोहियानगर का मामला सामने आया। यहां के पानी में क्रोमियम मिला होने से यह पीला हो गया है।
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यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। श्रीराम पिस्टन ने करोड़ों की लागत से जल शोधन संयंत्र भी लगाया, लेकिन कोई समाधान अभी तक नहीं हुआ है। लोहियानगर केसाथ ही शहर के साहिबाबाद, विजयनगर, मेरठ रोड आदि क्षेत्रों में कहीं का ग्राउंड वाटर भी पीने योग्य नहीं है।

हाल दो - मसूरी
यहां के पानी में लोगों को दुर्गंध आती है। इसका रंग लाल हो गया है। इस पानी को पीया ही नहीं जा सकता। माना जा रहा है कि क्षेत्र में चलने वाले स्लाटर हाउस के कारण ग्राउंड वाटर दूषित हुआ है। यहां के लोगों को दूसरे क्षेत्रों से लाकर सप्लाई का पानी दिया जाता है। ग्राउंड वाटर को लेकर इस क्षेत्र में आए दिन धरना-प्रदर्शन होते रहते हैं।

हाल तीन- लोनी
यहां पर कपड़ों की रंगाई का काम किया जाता है। जींस रंगने में प्रयुक्त होने वाला केमिकल ग्राउंड वाटर में मिल गया है। इसकेकारण ज्यादा क्षेत्र का पानी पीने लायक नहीं है। दिल्ली की फैक्ट्रियों का पानी भी लोनी क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों में फैल गया है। इसको लेकर यहां लंबे समय से लोग आंदोलन-प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है।

हाल चार- मोदीनगर
पिछले पांच साल में ही यहां के ग्राउंड वाटर में फैक्ट्रियों का केमिकल मिल गया है। यहां कपड़े की बड़ी फैक्ट्रियां हैं। इनमें केमिकल का प्रयोग किया जाता है। ज्यादातर फैक्ट्रियों में जलशोघन संयंत्र काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर क्षेत्रों का पानी पीने लायक नहीं है। इसमें स्नान करने से भी शरीर पर एलर्जी हो जाती है।

जनपद के ज्यादातर हिस्सों का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। ग्राउंड वाटर में फैक्ट्रियों का दूषित पानी डाला जा रहा है। जल शोधन संयंत्र एक्टिव नहीं हैं। तालाबों को कब्जाया जा रहा है। इस मामले को हम जिला प्रशासन के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कारखाना विभाग में उठा चुके हैं। एनजीटी के आदेश से शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद जगी है। - विनोद यादव, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रकृति बचाओ संगठन
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