साहिबाबाद। खाड़ी देशों में युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देशवासियों से सार्वजनिक वाहनों के उपयोग की अपील की तो आम जनता के साथ ही कई राज्यों के मुख्यमंत्री तक मेट्रो और मोटरसाइकिल से सफर करते नजर आए। वहीं, परिवहन निगम की बसों में सीट नंबर तीन माननीयों के इंतजार में वर्षों से इंतजार कर रही है। विधायक व सांसद के लिए रोडवेज की बसों में सीट नंबर तीन हमेशा बुक रहती है। हालांकि माननीयों के सफर न करने पर पर इस सीट का प्रयोग परिचालक ही करते हैं।
दरअसल परिवहन निगम के चालक, परिचालक और अधिकारियों तक को याद नहीं कि पिछली बार इस सीट पर कब और कौन से माननीय बैठे थे। ऐसे में आरक्षित होने के बावजूद इस सीट पर बैठकर लोग सफर करते हैं। कौशांबी डिपो में पिछले सात साल से कार्यरत परिचालक अभिषेक ने बताया कि उन्होंने आज तक किसी भी सांसद या विधायक को सफर करते हुए नहीं देखा, हालांकि एक सीट सभी साधारण बसों में आरक्षित होती हैै। वहीं, परिचालक तरुण चौधरी ने बताया कि साधारण बस में सीट सांसद व विधायक लिखकर आरक्षित रहती है जबकि एसी बसों में सीट रहती तो है लेकिन कुछ लिखा नहीं रहता। यात्रियों का कहना है कि यदि सांसद और विधायक समय-समय पर रोडवेज बसों में सफर करें, तो उन्हें जमीनी हकीकत का बेहतर अंदाजा हो सकेगा। बसों की स्थिति, यात्रियों की समस्याएं, सफाई, सुरक्षा जैसे मुद्दों को वह करीब से समझ पाएंगे। देशहित और पेट्रोल -डीजल की बचत को देखते हुए जनप्रतिनिधियों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना चाहिए।
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माननीयों के लिए बनाई गई एक सरकारी व्यवस्था है। यह उनकी स्वेच्छा पर निर्भर है कि सफर करना है या नहीं। वर्तमान में समय की बचत के लिए सांसद और विधायक सफर के लिए बेहतर विकल्प पर विचार करते हैं, हालांकि हमारी बसों में उनके लिए सीट हमेशा आरक्षित रहती है। हालांकि लंबे समय से उन्होंने कभी नहीं देखा कि कोई सांसद या विधायक इस सीट पर बैठा हो।
-अंशुल भटनागर, एआरएम, कौशांबी डिपो