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हर पल टीवी पर नजर, सलामती की मांग रहे दुआ

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हर पल टीवी पर नजर, सलामती की मांग रहे दुआ
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लोनी। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए लोनी के 12 छात्र-छात्राओं के परिजन बेचैन हैं। हर पल उनकी टीवी पर नजर है। अभिभावक उनकी सलामती को लेकर चिंतित हैं। कोई पूजा कर रहा है तो कोई दुआ मांग रहा है। छात्रों को खाने-पीने के सामान की किल्लत होने लगी है। वह वीडियो कॉल कर हालात की जानकारी दे रहे हैं। छात्रों को सकुशल लाने के लिए पूर्व विधायक मदन भैया ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है।
यूक्रेन सेना ने बंकर में रहने को कहा
टीला गांव में रहने वाले अशोक कुमार का बेटा अमन मावी मेडिकल का कोर्स करने के लिए तीन माह पहले यूक्रेन गया था। उन्होंने शनिवार को बेटे से फोन पर बात की। अमन यूक्रेन के एक बंकर में अपने कुछ साथियों के साथ रह रहा है। शनिवार को वह बंकर से बाहर आकर कुछ खाने के लिए सामान लेने के लिए गया था। लेकिन यूक्रेन की सेना ने उन्हें अंदर बंकर में रहने के लिए कहा। उनके पास चार दिनों का खाना बचा है। अमन ने परिजनों को बताया कि उनसे करीब दो किमी दूरी पर धमाके हो रहे हैं। धमाकों के चलते वह डरे हुए हैं। लोनी एसडीएम ने अशोक कुमार से फोन पर बात की।
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बमबारी से फ्लाइट हुई कैंसिल
उत्तरांचल सोसायटी में रहने वाले गिरीश चंद्र का बेटा भारत सत्यबली (22) चार साल पहले यूक्रेन एमबीबीएस करने गए थे। उन्होंने बताया कि सत्यबली बृहस्पतिवार रात 10 बजे भारत आने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे। इस दौरान वहां बमबारी हो गई। इसलिए फ्लाइट को रद्द कर दिया गया। वह अपने पांच साथियों के साथ फंस गए थे। उनके पास पैसे नहीं है। शनिवार को उनके बेटे ने फोन पर बताया कि हालात सामान्य होने पर ही निकला जा सकेगा। वह एंबेसी से बात कर रहे हैं। फ्लाइट रद्द होने से उनके साथी एक दूसरे की हिम्मत बढ़ा रहे हैं। परिजनों ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर बच्चों को जल्द घर जाने की मांग की है।
दिन-रात धमाकों की आवाज
बेहटा हाजीपुर निवासी दिल्ली एमसीडी में काम करने वाले ऋषिपाल के बेटे रोहन 17 जनवरी को यूक्रेन एमबीबीएस करने गए थे। युद्ध के दौरान वह फंस गए। वह सत्यबली के साथ हैं। रोहन ने परिजनों को बताया कि वह डेनीपरो में थे, लेकिन बाद में उडेसा में आ गए। रात और दिन बम धमाकों की आवाज सुनाई देती है। आसपास के लोग उनकी मदद कर रहे हैं। उनके पास दो जोड़ी कपड़े हैं। घर में मां सुनिता बेटे की सलामती के लिए दिन रात पूजा अर्चना कर रही हैं। परिवार सुबह से शाम तक टीवी की खबरों पर नजर रखता है।
एंबेसी से कर रहे बात
बलरामनगर कॉलोनी में रहने वाली संतोष का बेटा अभिषेक तीन साल पहले एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गए थे। उन्होंने बताया कि वह बेटा से फोन पर बात कर रही हैं। शनिवार को उनके बेटे ने बताया कि वह ठीक है। अभिषेक अपनी बुआ के लड़के नितिन और एक अन्य दोस्त के साथ डेनीपर स्थित एक पीजी में हैं। तीनों एक साथ हैं। वीडियो कॉल कर परिजनों से बात कर रहे हैं। वह एंबेसी से लगातार बात कर रहे हैं। लेकिन सुरक्षा के मध्य नजर किसी को भी आने नहीं दे रहे है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द सभी बच्चों को घर लाया जाए।
खाने-पीने की परेशानी
विकास कुंज कॉलोनी में रहने वाले प्रमोद ठाकुर का बेटा शिवम दो साल पहले यूक्रेन में एमबीबीएस करने गया था। परिजनों ने बताया कि शनिवार को उसने फोन पर बताया कि वह ठीक है। खाने-पीने की परेशानी हो रही है। वह लगातार प्रयास कर रहे हैं कि उनका बेटे जल्द घर आ जाए। जहां शिवम ठहरे हैं, वहां आसपास धमाके हो रहे हैं। दहशत का माहौल है। उन्होंने सरकार से जल्द भारत बुला लेने गुहार लगाई है। परिजनों ने लोनी एसडीएम और सांसद वीके सिंह से फोन पर बात कर मदद की गुहार लगाई है।
हॉस्टल में ठहरे
बंथला में रहने वाले लखविंदर चौधरी के बेटे गौतम एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन 9 दिसंबर 2021 को गए थे। वह अपने साथियों के साथ दीनूपरो यूनिवर्सिटी हॉस्टल में हैं। बेटे ने परिजनों से फोन पर बात कर बताया कि हॉस्टल से ही खाने की व्यवस्था हो रही है। डर का माहौल है। उनके पिता ने बताया कि फ्लाइट चलने का इंतजार कर रहे हैं। पोलैंड के रास्ते आने की कोशिश की, लेकिन निकल नहीं पाए। कुछ दूरी पर लगातार धमाके हो रहे हैं।
रात में लाइट बंद करने का आदेश
बलराम नगर में रहने वाले डॉ. संजीव की बेटी विशाखा अगस्त 2020 में एमबीबीएस करने गई थी। शनिवार को उससे बात हुई। वह एक हॉस्टल में हैं। जिस स्थान पर वह रह रही है, वहां रात के समय लाइट बंद करने के लिए कहा गया है। खाने-पीने की परेशानी नहीं है। बेटी ने पहले से ही खाना स्टोर कर रखा है। परिवार के लोगों ने सरकार को ट्वीट कर बेटी को घर बुलाने की मांग की है। वह लगातार बेटी से फोन पर बात कर रहे हैं।
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रुक-रुक हो रहे धमाके
मेवला भट्टी गांव में रहने वाले उदयवीर सिंह के बेटे अजय राज भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। शनिवार को हुई बातचीत में अजय राज ने बताया खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है। बेटे ने कहा कि भारत सरकार जितना जल्द हो सके, उन्हें वहां से निकाले। आसपास धमाकों की आवाज रुक-रुक कर आ रही है। एंबेसी से बात हुई थी। पोलैंड के रास्ते निकालने के लिए कहा, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकला है। वह और परिवार के लोग परेशान हैं। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
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