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काबुल से खौफ में आए, वतन देखते ही खिलखिलाए

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काबुल से खौफ में आए, वतन देखते ही खिलखिलाए
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साहिबाबाद। भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत बृहस्पतिवार को काबुल से 35 लोगों को ईरान के रास्ते हिंडन वायुसेना स्टेशन लाया गया। काबुल से लौट लोग खौफ में थे। जैसे ही वह भारत की धरती पर उतरे तो उनके चेहरे खिलखिला उठे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे सी-17 ग्लोबमास्टर से उतरते ही लोगों ने भारत मां की जय के नारे लगाकर खुशी जाहिर की। इन 35 लोगों में 11 नेपाल नागरिक हैं। कोरोना जांच के बाद सभी को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के कैंप में क्वारंटाइन किया गया है।
भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट कर बताया कि ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत काबुल से 24 भारतीय और 11 नेपाली लोगों को लेकर सी-17 ग्लोबमास्टर भारत आ गया है। विमान को हिंडन वायुसेना स्टेशन में उतारा गया। ईरान के रास्ते सभी को वाया जामनगर होते हुए गाजियाबाद पहुंचाया गया है। इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर शाम करीब सवा तीन बजे सभी को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की बस में बैठाकर सेना के क्वारंटीन सेंटर ले जाया गया। स्टेशन से निकलते और बस में बैठते वक्त भी लौटे लोगों ने भारत माता का जयकारा लगाकर और विक्ट्री बनाकर खुशी जाहिर की। काबुल से आए कोलकाता निवासी राजेश विश्वास ने बताया कि हम लोग यूएस आर्मी बेस कैंप में सुरक्षित थे। तालिबान का कब्जा होने के बाद हम सभी भारत दूतावास के संपर्क में आ गए। इसके बाद सभी को सुरक्षित एयरपोर्ट पर ले जाया गया। हम लोग वायुसेना के सहयोग से भारत लौट आए हैं। हमें भारत सरकार और वायुसेना पर गर्व है।
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तालिबान का भारतीयों के प्रति रवैया जानने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम लोगों के सिर्फ पासपोर्ट चेक करने के बाद किसी ने कुछ नहीं कहा। एक अन्य भारतीय युवक ने बताया कि काबुल में जो लोग दूतावास के संपर्क में नहीं हैं या बाहर हैं। उन्हें वहां पर परेशान किया जा रहा है। दूसरे युवक ने बताया कि तालिबान सिर्फ अफगानिस्तान के लोकल लोगों को एयरपोर्ट पर आने के लिए रोक रहा है। वहां हालात ठीक नहीं हैं।
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अलग किए भारतीय नागरिक और नेपाली मूल के लोग
हिंडन वायुसेना स्टेशन परिसर में सभी लोगों को एक साथ अधिकारियों द्वारा एक सफेद रंग की स्कूल बस में मुख्य गेट तक लाया गया। इसके बाद सुरक्षा कर्मी के रूम की तरफ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की दूसरी बस पहुंच गई। करीब पौने घंटे तक सफेद बस में नेपाली मूल के 11 लोगों को सामान सहित बैठाया गया। जबकि 24 भारतीय लोगो को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की बस में बैठाकर उन्हें क्वारंटीन सेंटर ले जाया गया।
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