फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों की जीत से जगी रास्ता खुलने की उम्मीद

विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों की जीत से जगी रास्ता खुलने की उम्मीद
विज्ञापन

साहिबाबाद। कृषि बिल वापस होने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलान के बाद गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, गढ़ और मेरठ के लाखों लोगों में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरने की उम्मीद जगी है। एक्सप्रेसवे यूपी गेट पर 30 जनवरी 2020 से बंद है। बैरिकेडिंग के कारण लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं। हाईवे खुलने के बाद स्थानीय स्तर पर इंदिरापुरम, वैशाली और वसुंधरा के लोगों को वाहनों के प्रदूषण व जाम से राहत मिलेगी।
स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से किसानों की समस्या का समाधान कराने की मांग की है। किसान गत साल 28 नवंबर को यूपी गेट पहुंचे थे। तब पुलिस प्रशासन ने गाजीपुर के रास्ते दिल्ली जाने वाली लेन पर लोहे की बैरिकेडिंग लगा दी थी। इसके बाद किसानों का कारवां बढ़ा और उन्होंने दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर डेरा जमा लिया। दो दिसंबर को एनएच-9 पर किसानों द्वारा मंच बनाने के बाद दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर बैरिकेडिंग लगाकर उसे बंद कर दिया। 26 जनवरी को लालकिले की घटना के बाद 30 जनवरी को गाजीपुर सर्विस लेन, एनएच-9 और दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर सीमेंटेड बैरियर से पक्का बंद कर दिया गया था। लोहे के बैरियर पर कंटीले तार भी लगाए थे। जिससे किसान दिल्ली में न घुस पाएं। सुप्रीम कोर्ट में रास्ता बंद होने की याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने एक्सप्रेसवे से सीमेंटेड बैरियर हटा दिए। लेकिन अभी भी हाईवे पर गाजियाबाद से दिल्ली की तरफ जाने वाले रास्ते पर गाजीपुर की तरफ सीमेंटेड बैरियर लगा हुआ है। लेन बंद होने से हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, गढ़, बुलंदशहर और अन्य जगहों के लाखों लोगों को भारी दिक्कत होती है। उन्हें आनंद विहार-कौशांबी, दिल्ली वजीराबाद रोड और दिलशाद गार्डन बॉर्डर की तरफ से निकाला जा रहा है। जबकि नोएडा जाने के लिए लोगों को खोड़ा-गाजीपुर के सर्विस रोड से निकलना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर लगे हैं किसानों के टेंट
यूपी गेट पर आंदोलन में शामिल अलग-अलग संगठनों के किसानों के लिए दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर टेंट, लंगर और आंदोलन मंच बना हुआ है। खोड़ा के पास पुलिस ने आंदोलन स्थल में जाने के लिए चेकपोस्ट बनाया हुआ है। जो एनएच-9 की लेन पर है। जबकि दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे की लेन पर अभी तक कई किसानों के टेंट लगे हैं, जिसमें खाने-पीने का सामान रखा है। टेंट व लंगरों के बीच से सिर्फ एंबुलेंस, छोटे फायर टेंडर व दो पहिया वाहनों के निकलने के लिए जगह है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें