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75 दिन से मास्क के चालान नहीं, कोरोना की जांच 55 फीसदी घटी

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75 दिन से मास्क के चालान नहीं, कोरोना की जांच 55 फीसदी घटी
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गाजियाबाद। शहर में मास्क लगाए बगैर घूमने वाले लोगों के चालान पिछले 75 दिन से नहीं काट जा रहे हैं। सामाजिक दूरी का पालन न करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई भी बंद हो चुकी है। कोरोना की जांच 55 फीसदी तक घट गई है ... यह लापरवाही कहीं तीसरी लहर का सबब न बन जाए। आशंका इसलिए मंडराई है क्योंकि बाजारों में सामाजिक दूरी के नियम तार-तार हो रहे हैं और बगैर मास्क के लोग घूम रहे हैं। जिन अफसरों पर कोविड गाइडलाइन का पालन कराने की जिम्मेदारी है, वे नए स्ट्रेन पर सिर्फ एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। इनके दफ्तरों में कोविड हेल्प डेस्क तक बंद हो चुकी हैं। अमर उजाला की पड़ताल में कई स्तर पर लापरवाही मिली।
कोरोना के केस भी अब पहले से ज्यादा मिल रहे हैं। अक्तूबर में 10 दिन में एक मिल रहा था। नवंबर में हर पांचवे दिन संक्त्रस्मित मिल रहा है। नए सभी मरीज बाहर से घूमकर आए थे। इसके बावजूद बाहर से आने वाले लोगों की जांच के लिए अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों पर दूसरी लहर के कहर के दौरान मई से जुलाई तक थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग की जो व्यवस्था की गई थी, वह कब की ठप हो चुकी है। जिले में अब तक 55680 लोग संक्त्रस्मण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 55215 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 461 की मौत हो चुकी है। दो मरीज होम आईसोलेशन में इलाज करा रहे हैं, जबकि एक मरीज अस्पताल में भर्ती है।
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टीकाकरण का ग्राफ गिरा
माह रोज औसत टीकाकरण
अगस्त आठ हजार
सितंबर - सात हजार
अक्तूबर - आठ हजार
नवंबर - छह हजार
3.50 लाख
को पहला टीका नहीं लगा
13.30 लाख
को दूसरा टीका नहीं लगा
7400 से 3600 रह गई जांच
जुलाई से सितंबर तक रोज 7400 लोगों की जांच की जाती थी, नवंबर में रोज का औसत 3600 है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा। ऑपरेशन कराने या बाहर जाने वाले लोग ही जांच करा रहे हैं।
बेड मिलना भी मुश्किल
दूसरी लहर के दौरान सरकारी और प्राइवेट 58 अस्पतालों में 3410 बेड आरक्षित किए गए थे। इनमें से 731 आईसीयू बेड थे। संक्त्रस्मण कम होने के बाद सभी बेड सामान्य कर दिए गए। एक सप्ताह पहले बुजुर्ग में कोरोना के लक्षण मिलने पर इलाज नहीं मिला था, उन्हें दिल्ली में भर्ती होना पड़ा था
70 फीसदी गिरा सैनिटाइजर का उत्पादन
जिले में तीन महीने पहले तक एक इकाई 10 से 12 हजार लीटर सैनिटाइजर प्रतिदिन उत्पादन कर रही थीं। अब दो से तीन हजार लीटर तैयार किया जा रहा है। उत्पादन 70 फीसदी गिरा है, 11 में से चार इकाईयों ने उत्पादन बंद कर दिया । उद्यमी शरद गुप्ता ने बताया कि मांग नहीं आई तो सैनिटाइजर का उत्पादन करना पड़ा।
1500 की जगह बन रहे 500 मास्क
मास्क उत्पादन में 20 फीसदी तक गिरावट आई है। 45 इकाईयां और संस्थाएं कपड़े के मास्क तैयार करती हैं। पहले एक इकाई डेढ़ हजार मास्क का उत्पादन कर रही थी। अब 500 मास्क तैयार कर रही हैं। उद्यमी रामअवतार शर्मा ने बताया कि मांग न होने पर मास्क उत्पादन बंद कर रेडीमेड गारमेंट तैयार कर रहे हैं।
जिम्मेदारों की दलील
गाइडलाइन जारी करने के साथ ही टीकाकरण को बढ़ाने के लिए सोसायटियों और मदरसों में अभियान चला रहे हैं। लोगों से अपील है कि भीड़ वाले स्थान पर जाने से बचें। बिना मास्क लगाए घर से न निकलें।
डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है। जांच और टीकाकरण को बढ़ाने के निर्देश सीएमओ को दिए गए हैं। सभी विभागों को सैनिटाइजर और थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग की हर समय व्यवस्था रखने के लिए कहा है।
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राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी
मास्क न पहनने और समाजिक दूरी का पालन न करने के अगस्त तक 2,67,987 चालान काटे गए । पिछले ढाई महीने में कोई चालान नहीं किया है। अब पुलिस लोगों को जागरूक कर रही है।
पवन कुमार, एसएसपी
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