27 साल बाद भी मकानों को स्थायी पता न दे पाया नगर निगम
गाजियाबाद। नगर निगम 27 साल बाद भी आधे शहर के लोगों को स्थायी मकान नंबर नहीं दे पाया। खासतौर से पुरानी और निजी कॉलोनियों में मकान नंबर न होने की वजह से लोगों की चिट्ठियां तक भटक रही हैं। पार्षदों का कहना है कि भवन नंबर न होने की वजह से क्षेत्र में कई लोगों के नौकरी के नियुक्ति पत्र वापस लौट चुके हैं और वह नौकरी पाने से वंचित हो गए हैं। शहर का विस्तार होने के साथ-साथ यह समस्या लगातार बढ़ रही है। निगम पार्षद इस समस्या को सदन में भी कई बार उठा चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
जीडीए की ओर से बसाई गईं कॉलोनियों में तो ब्लॉक और भवनों को स्थायी नंबर दिया गया है, लेकिन मालीवाड़ा, चौपला, हिंडन विहार, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, महरौली, दुहाई, मोरटा समेत ग्रामीण परिवेश के अन्य वार्डों में भवन संख्या स्थायी नहीं है। नगर निगम के रिकॉर्ड में कोई और नंबर दर्ज है तो मौके पर कोई और नंबर है। पार्षदों का कहना है कि इसकी वजह से लोगों की चिट्ठियां और ऑनलाइन मंगाया जाने वाला सामान सही मकान तक नहीं पहुंच पा रहा है। होम डिलीवरी करने वाले वेंडर भटककर बैरंग लौट जाते हैं।
-----
पार्षदों ने कॉलोनियों में बोर्ड लगवाने की मांग उठाई
इस समस्या से जूझने वाले लोग पार्षदों से शिकायत कर मकान का स्थायी पता दिलाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग पर भाजपा पार्षद राजेंद्र तितोरिया, कांग्रेस पार्षद जाकिर अली सैफी समेत कई अन्य पार्षद भवनों को स्थायी नंबर देकर कॉलोनियों में गलियों के बाहर बोर्ड लगवाने की मांग कर चुके हैं। नगर निगम सदन ने इस पर सहमति दी थी, लेकिन नगर निगम ने शास्त्री नगर, विवेकानंद नगर समेत कुछ ऐसी कॉलोनियों में बोर्ड लगवा दिए हैं, जिनमें मकान नंबर जीडीए की ओर से ही अंकित करा दिए गए हैं।
------
बयान
दिल्ली में हर गली में मकान नंबरों के बोर्ड लगे रहते हैं। ऐसी जगहों पर रिश्तेदारों को भी एड्रेस तलाशने में दिक्कत नहीं होती। गाजियाबाद की पुरानी कॉलोनियों में आकर रिश्तेदार, चिट्ठियां और ऑनलाइन बुक किए गए सामान की डिलीवरी करने आने वाले वेंडर भटक जाते हैं। नगर निगम अधिकारियों ने दो-तीन वार्ड में बोर्ड लगवाकर जिम्मेदारी पूरी कर ली। आगामी बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को फिर सदन के समक्ष उठाएंगे। - राजेंद्र तितोरिया, पार्षद, मालीवाड़ा क्षेत्र
---
नगर निगम अधिकारी शहर के लोगों को सहूलियत वाले कार्यों को करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। अपने फायदे के निर्णयों को तत्काल लागू कर दिया जाता है। मकानों को स्थायी पता दिए जाने का प्रस्ताव सदन में कई बार पास हो चुका है। इसके बाद भी कॉलोनियों में बोर्ड नहीं लगवाए जा रहे हैं। - जाकिर सैफी, पार्षद कैला भट्ठा क्षेत्र
--
जीआईएस के माध्यम से पूरे शहर में मकानों का सर्वे कराया गया है। हर मकान को यूनीक आईडी नंबर दिया जा रहा है। 14 अंक के इस नंबर में अंतिम दो या तीन अंक भवन संख्या है। यही भवन नंबर अब स्थायी रहेगा। अब हर मकान का नंबर स्थायी होगा। - डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी