फ्लैट बनाने का टेंडर लेकर सेवानिवृत्त अफसरों की 35 बीघा जमीन बेची
गाजियाबाद। विजयनगर के अकबरपुर बहरामपुर में सेवा सुरक्षा सहकारी आवास विकास समिति के सदस्य और बिल्डर ने सांठगांठ कर करीब 35 बीघा जमीन पर फ्लैट बनाकर बेच दिए। 1992 में सेवा सुरक्षा एजेंसियों के 196 सेवानिवृत्त अफसरों ने आवास विकास समिति लखनऊ से पंजीकृत कराकर रहने के लिए किसानों से करीब 40 बीघा जमीन खरीदी थी। इसमें 25 बीघा जमीन बिल्डर को देकर 15 बीघा में अफसरों के लिए आवास बनने थे लेकिन बिल्डर ने समिति के पदाधिकारियों के साथ सांठगांठ कर 25 बीघा जमीन पर फ्लैट बनाकर बेच दिए और शेष जमीन पर अफसरों को तय समय में फ्लैट दिए न रुपये दिए।
रॉ एजेंसी के सेवानिवृत्त अधिकारी विकास चोपड़ा ने बताया कि 1992 में एसएसबी, आईबी, रॉ समेत अन्य एजेंसियों के 196 सेवानिवृत्त अधिकारियों मिलकर जमीन खरीदी थी। इस जमीन पर उनके आवास बनने थे। जीडीए व अन्य दस्तावेज के काम देखने के लिए उन्होंने चुनाव कराकर समिति बनाई लेकिन कई बाधाओं के कारण लंबे समय तक निर्माण नहीं हो सका। 2012 में नई समिति का गठन हुआ। इस समिति के अध्यक्ष एससी कटोच बने। एससी कटोच व अन्य पदाधिकारियों की सहमति बनी कि इस जमीन में से 25 बीघा जमीन बिल्डर को देकर शेष जमीन में बिना रकम दिए बिल्डर से फ्लैट बनवाए जाएं। इसके बाद उन्होंने टेंडर प्रक्रिया की जिसमें तीन बिल्डरों ने अपनी फाइल प्रस्तुत की। आरोप है कि एचसी कटोच ने उन तीन बिल्डरों में से किसी को टेंडर ना देकर श्रेष्ठा लैंड प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर संदीप सिंह को टेंडर दे दिया। मकान जल्दी मिलने को लेकर 196 सदस्यों ने सहमति दे दी। इसमें तय हुआ कि बिल्डर 2016 तक फ्लैट बनाकर आवंटित करके अगर तय समय में नहीं किए तो 8 हजार रुपये प्रतिमाह किराया जुर्माने के नाम पर भुगतान करेगा। सदस्यों का आरोप है कि बिल्डर ने फ्लैट दिए ना रुपये दिए। आरोप है कि बिल्डर ने समिति के पदाधिकारी के साथ मिलकर जमीन व फ्लैट बेचकर 200 करोड़ रुपये कमा लिए।
मामले में विजयनगर थाने में बिल्डर संदीप सिंह, समिति के अध्यक्ष एससी कटोच, उपाध्यक्ष प्रद्युमन कांत, सचिव पीके पांडे, सदस्य आरके राजवंशी, आरके सिंह, डीएस राठी और अमीलाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। विजयनगर थाना प्रभारी योगेंद्र मलिक का कहना है कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जांच की जा रही है। जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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70, 100 और 200 गज के देने थे फ्लैट
196 सदस्यों की समिति के सदस्य एसएसबी से सेवानिवृत्त बीसी पति ने बताया कि टेंडर के अनुसार बिल्डर को 70, 100 और 200 गज के 264 फ्लैट बनाने थे। 1992 में जमीन खरीदने के लिए सदस्यों ने एक से डेढ़ लाख रुपये निवेश किए थे अब बिल्डर व समिति के पदाधिकारियों ने मिलकर फर्जीवाड़ा करके जमीन बेच दी।
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तय 15 बीघा जमीन में भी कर दिया घोटाला
सेवानिवृत्त अधिकारी विकास चोपड़ा ने बताया कि बिल्डर ने 25 बीघा से अलग उनकी 15 बीघा में से भी 10 बीघा पर कब्जा करके फ्लैट बनाकर बेच दिए। इसके बाद शेष पांच बीघा में जीडीए की अनुमति के बिना कुछ फ्लैट बना दिए जो अधूरे पड़े हैं। उन्होंने सदस्यों के साथ मिलकर शासन-प्रशासन और पुलिस से शिकायत की है लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।