नरेशानंद के पास ही सो रहे साधु मनोज का कहना है कि जब हमला हुआ तो उन्हें लगा कि वह सपना देख रहे हैं और उन्हें मारने के लिए कोई आया है। उन पर हमले के वक्त हमलावर से पेपर कटर गिर गया था। जब ब्लेड से हमला हुआ, तब अहसास हुआ कि कुछ हो रहा है। वह चादर ओढ़े हुए थे, इसलिए हमलावर नजर नहीं आए। नरेशानंद पर हमले का भी अहसास नहीं हुआ। यही लगता रहा कि हमले जैसा कुछ हो रहा है लेकिन यह हकीकत में नहीं, सपने में है। नरेशानंद चीखे तो उनकी आंख खुली। वह पुलिसवालों के पास जा रहे थे।
सीसीटीवी से तलाश रहे हैं सुराग - एसपी देहात
एसपी देहात डॉ. ईरज राजा का कहना है कि साधुओं पर हुए हमले के मामले में सीसीटीवी फुटेज की मदद से सुराग तलाशे जा रहे हैं। मंदिर के बाहर पुलिस ने कैमरे लगवा रखे हैं। इनकी फुटेज निकलवाई है। अंदर मंदिर कमेटी ने कैमरे लगवा रखे हैं, ये काम नहीं कर रहे।
मंदिर में जिस जगह हमला हुआ, उसके पास ही पुलिस की गारद लगी है। इस पर चार पुलिसवाले तैनात हैं। इनके बारे में एसपी देहात ने रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी है। माना जा रहा है कि इन्हें निलंबित किया जा सकता है। अन्य 18 पुलिसवाले मंदिर परिसर में ही मौजूद थे। यह भी मालूम किया जा रहा है कि वे जाग रहे थे या सोए हुए थे? अगर जाग रहे होते तो हमलावरों का पता चल जाता। जल्द ही इन पर भी गाज गिर सकती है।
जांच में दोषी मिले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किस स्तर पर लापरवाही हुई है, उसकी भी जांच कराई जा रही है। बदमाशों के बारे में पता लगाया जा रहा है। -अमित पाठक, एसएसपी
50 लोग मौजूद थे मंदिर में
घटना के वक्त 22 पुलिसवालों के अलावा मंदिर की सुरक्षा में लगे आठ निजी सुरक्षाकर्मी समेत कुल 50 लोग मौजूद थे। इन सभी को घटना का पता तब चला जब नरेशानंद की चीख निकली। सेवादार भागकर उनके पास पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर जा चुके थे।