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किसान आंदोलन: राकेश टिकैत बोले- तीन राज्यों का आंदोलन बताने वाले का कर दिया मुंह बंद

Tue, 28 Sep 2021 12:29 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को किसानों की समस्या का समाधान करना चाहिए। सरकार किसानों को नासमझ न समझे। उत्तर प्रदेश में जो गन्ना मूल्य की घोषणा की गई है, वह भी किसानों के साथ मजाक है। गन्ना मूल्य वृद्धि के लिए भी जल्द ही सड़कों पर आंदोलन किया जाएगा।
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राकेश टिकैत - फोटो : राकेश टिकैत के ट्विटर अकाउंट से
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विस्तार
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भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भारत बंद के बाद शाम में कहा कि तीन राज्यों का आंदोलन बताने वाले लोग आंख खोल कर देख लें कि पूरा देश किसानों के साथ खड़ा है। आज के आंदोलन ने उनका मुंह बंद कर दिया जो कह रहे थे कि, यह महज तीन राज्यों का आंदोलन है। तीन कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी पर गारंटी तक आंदोलन जारी रहेगा।

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राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को किसानों की समस्या का समाधान करना चाहिए। सरकार किसानों को नासमझ न समझे। उत्तर प्रदेश में जो गन्ना मूल्य की घोषणा की गई है, वह भी किसानों के साथ मजाक है। गन्ना मूल्य वृद्धि के लिए भी जल्द ही सड़कों पर आंदोलन किया जाएगा।

'कुछ लोगों को परेशानियां हुई होंगी, लेकिन एक दिन किसानों के नाम का सोच कर भूल जाएं'
टिकैत ने कहा कि भारत बंद के कार्यक्रम से कुछ लोगों को स्वाभाविक रूप से परेशानी हुई होगी, लेकिन एक दिन किसानों के नाम सोच कर भूल जाएं। किसान 10 माह से घर छोड़कर सड़कों पर है, लेकिन सरकार को न तो कुछ दिखाई देता है और न ही सुनाई देता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
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सरकार इस भुलावे में ना रहे कि किसान खाली हाथ घर लौट जाएंगे। किसान आज भी बिल वापसी तो घर वापसी की मांग पर पूरी तरह से अडिग हैं। हमारी सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए।

'भारत बंद पूरी तरह से सफल रहा'
राकेश टिकैत ने कहा कि सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद पूरी तरह से सफल रहा। देशभर में किसानों ने सड़कों पर आकर अपने गुस्से का इजहार किया। देशभर में हजारों जगह से भी ज्यादा किसान सड़कों पर बैठे। बंद को किसानों के साथ साथ मजदूर, व्यापारियों, कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन का भी सहयोग मिला। देश की  राजनीतिक पार्टियों ने भी बंद का समर्थन किया। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक किसानों के बंद का पूरा असर रहा।

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