नेहरू नगर थर्ड स्थित एक मकान में रविवार दोपहर वाहनों के इंश्योरेंस एजेंट संजय मित्तल (50) और उनकी बेटी प्रज्ञा (10) के शव अंदर से बंद कमरे में मिले। पिता के मुंह से झाग और बेेटी के मुंह से खून निकल रहा था। कमरे में कागज के टुकड़े बिखरे थे, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस और परिजनों का मानना है कि आर्थिक तंगी की वजह से जहर खाकर आत्महत्या की गई है।
एसएचओ सिहानी गेट अवनीश गौतम ने बताया कि संजय मित्तल नेहरू नगर थर्ड में किराए पर सोनू भाटी के मकान में पत्नी यशोदा और दो बेटियों रेणु (18) और प्रज्ञा के साथ रहते थे। यशोदा और रेणु मेड का काम करती हैं। दोनों रविवार सुबह सात बजे काम पर गई थीं। घर पर संजय मित्तल और प्रज्ञा थी। प्रज्ञा पहली कक्षा में पढ़ती थी। यशोदा ने बताया कि सुबह साढे़ नौ बजे पति ने उन्हें फोन कर पूछा था कि घर किस समय तक आएंगी।
उन्होंने करीब एक बजे तक आने को कहा। साढे़ दस बजे ननद मुन्नी ने कॉल कर बताया कि संजय उनकी कॉल रिसीव नहीं कर रहे हैं। घर जाकर देखो। जल्दी से काम निबटा कर वह एक बजे बेटी के साथ घर पहुंचीं। कमरा अंदर से लॉक था, कई बार दरवाजा खटखटाने पर अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो पड़ोसियों के साथ मिलकर दरवाजा तोड़ दिया।
कमरे में बेड पर संजय की गोद में प्रज्ञा का शव था। सूचना पुलिस को दी गई और स्थानीय डॉक्टरों को बुलाया गया। डॉक्टरों ने दोनों की मौत की पुष्टि की। फोरेंसिक टीम के साथ सिहानी गेट पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन की। एसएचओ ने बताया कि कमरे में मिले कागज के टुकड़ों को जोड़ कर देखा जा रहा है कि वह सुसाइड नोट तो नहीं हैं।
यशोदा ने बताया कि संजय को कभी कभार ही वाहनों का इंश्योरेंस कराने का काम मिलता था, वह लगभग बेरोजगार ही रहते थे। इस वजह से अक्सर परेशान रहते थे। कई बार इसका जिक्र उन्होंने किया था, इसलिए वह भी आर्थिक तंगी की वजह से आत्महत्या किया जाना मान रही है।