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बाल आश्रम के बच्चों की सुध नहीं ले रहा प्रशासन

Mon, 20 Jun 2016 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
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बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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माता-पिता से दूर रहने की पीड़ा बाल आश्रम में रहने वाले बच्चों ज्यादा कौन जानता होगा। बच्चे अपने माता-पिता के इंतजार में हर पल को गुजारते हैं। इन बाल आश्रमों में प्रशासन की तरफ से भटके हुए और लावारिस बच्चों को भेजा जाता है। ऐसे बच्चों को बाल आश्रम में भेजने के बाद अधिकारी दोबारा वहां बच्चों का हाल चाल लेने तक नहीं आते। बाल आश्रम के संचालक बच्चों का जीवन संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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शहीद नगर स्थित आशादीप फाउंडेशन में करीब 32 और वसुंधरा के लाल बहादुर शास्त्री सुदर्शनम बाल आश्रम में 33 बच्चे रह रहे हैं। 10 से 18 वर्ष आयु के इन बच्चों को रखने के साथ उनकी शिक्षा और आत्म निर्भर बनाने का काम आश्रम कर रहे हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भेजा जाता है। बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सकें, इसके लिए उन्हें संगीत, सिलाई, कढ़ाई आदि की बारीकियां सिखाई जाती हैं। इसके साथ ही बाल आश्रम के लोग बच्चों के माता-पिता की तलाश करने का काम भी करते हैं।

दस-दस वर्ष से बाल आश्रम में रह रहे हैं बच्चे: शहीद नगर स्थित आशा दीप फाउंडेशन में लक्ष्मण और इजराइल दस वर्ष से रह रहे हैं। लक्ष्मण दसवीं पास कर चुका है। जबकि इजराइल ने इस वर्ष 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इतने वर्षों बाद तक भी प्रशासन इन्हें इनके परिवार से अब तक नहीं मिला सका। इन बच्चों ने भी अब आश्रम को ही अपना परिवार बना लिया है। आश्रम में पले-बढ़े ये बच्चे आश्रम में रहकर दूसरे बच्चों को संभाल रहे हैं।
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स्पॉन्सरशिप और डोनेशन के जरिए चल रहे हैं शेल्टर होम्स
शहीद नगर के शेल्टर होम को बने हुए करीब 22 वर्ष हो चुके हैं। वहीं वसुंधरा का शेल्टर होम वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। अभी तक यह बाल गृह डोनेशन और स्पॉन्सरशिप पर चल रहे हैं। इन शेल्टर होम ने सरकार से आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया है।

सोशल साइट के जरिए ट्रेस होता है बच्चों का परिवार
बाल आश्रम में रह रहे बच्चों की सुध भले ही प्रशासन न ले। एनजीओ संचालक सोशल साइट के जरिए बच्चों के परिवार को तलाशते हैं। वसुंधरा सेक्टर-1 स्थित लाल बहादुर शास्त्री सुदर्शनम बाल आश्रम में दस माह से रह रहे शिव के माता-पिता को फेसबुक के जरिए ही तलाशा गया।  कुछ दिन पहले इंदिरापुरम की जयपुरिया सनराइज ग्रीन में रहने वाली महिला ने अपने बेटे का जन्मदिन आश्रम में मनाया था। उसकी फोटो फेसबुक पर अपलोड की थी। उनके अकाउंट से शिव के फुफेरे भाई मुकेश भी जुड़े हुए थे। उन्होंने फेसबुक पर शिव की फोटो देखी, तो वह उसे पहचान गए। अगले दिन वह शिव के मां और भाई के साथ आश्रम पहुंचे।
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