यहां जांच के बाद पता चला कि बच्चे ने सीटी निगल ली है जो उसके गले में फंस गई है। इस वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही है। कुछ बोलने या सांस लेने में सीटी बज रही है। घटना के बाद बच्चे को एम्स के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग और बाल चिकित्सा विभाग में लाया गया। यहां वरिष्ठ डॉक्टरों ने बच्चे की जांच करने के बाद सीटी निकालने का प्रयास किया।
बच्चे को पहले बाल शल्य चिकित्सा विभाग में भर्ती कराया गया। यहां जांच के बाद ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया और एंडोस्कोपी के माध्यम से सीटी को हटा दिया गया। यह प्रक्रिया जटिल थी। इसके फेल होने से बच्चे की जान तक जा सकती थी। ऐसे में संभावित ट्रेकियोस्टोमी के लिए विशेषज्ञों को उपलब्ध रहने के लिए सतर्क कर दिया गया था।
यदि जरूरत पड़ती तो तुरंत ओपन चेस्ट सर्जरी भी की जा सकती थी। इसके लिए सर्जिकल उपकरण तैयार कर लिए गए थे। बता दें कि सोमवार को एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग और बाल चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ इस केस की जानकारी देंगे।
हर चीज को मुंह में डालते हैं बच्चे
बता दें कि 18-24 महीने के बच्चे अक्सर हाथ में आने वाली सभी वस्तु को मुंह में डालते हैं। ऐसा करना कई बार घातक हो सकता है। चार साल के बच्चे के साथ जो घटना हुई वह जीवन के लिए खतरनाक है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एम्स का बाल चिकित्सा विभाग पूरे समाज को संदेश देना चाहता है कि अपने बच्चों को ऐसी चीजों और खिलौनों से खेलने न दें।
छोटे सामान नेकलेस बीड्स, खिलौनों के अंदर इस्तेमाल होने वाली सूखी बैटरियां, चाइनीज खिलौने में लगे छोटे पुर्जे को बच्चे की पहुंच से दूर रखना चाहिए। इस तरह की घटनाओं के परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। ऐसे मामलों में मस्तिष्क क्षति, जीवन की हानि, ओपन चेस्ट सर्जरी या ट्रेकियोस्टोमी करने की आवश्यकता हो सकती है।