आखिर ऐसी क्या मजबूरी बनी कि अंकित और अर्पित गुप्ता को एक साथ फांसी लगानी पड़ी। दोनों की मौत के बाद से परिवार का रोते-रोते बुरा हाल है। परिवार के करीबियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से दोनों भाई परेशान चल रहे थे। दोनों को कारोबार में काफी नुकसान हुआ था। इसकी वजह से कारोबार को उठाने के लिए दोनों ने अपने पड़ोसी एक फाइनेंसर से मोटे ब्याज पर कर्जा ले लिया।
कोरोना की वजह से लॉक डाउन हुआ तो रहा-सहा कारोबार भी चौपट हो गया। अब फाइनेंसर के बदमाश बाउंसर रोजाना दफ्तर आकर कर्मचारियों के सामने ही दोनों को धमकाते थे। एक कर्मचारी ने तो मारपीट तक करने की बात बताई। पुलिस परिवार के अलावा दोनों भाईयों के यहां काम करने वाले कर्मचारियों का बयान लेकर मामले की छानबीन कर रही है।
चांदनी चौक के एक दुकानदार ने बताया कि अंकित और अर्पित के दादा रामनाथ गुप्ता का घड़ियों का बड़ा कारोबार था। रामनाथ के बेटे आदेश्वर गुप्ता ने पिता का काम न करके अपना प्रॉपर्टी का काम किया। इनकी मेन रोड पर पुश्तैनी बिल्डिंग है। पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल आदेश्वर के हिस्से में है जबकि ग्राउंड फ्लोर की दुकानें उनके आदेश्वर के दूसरे भाइयों की हैँ। आदेश्वर के दो बेटों ने कृष्णा ज्वेलर्स के नाम स जेवरात बनाने का काम किया।
अपनी पुश्तैनी प्रॉपर्टी की पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर इन लोगों ने अपना कारखाना भी बनाया। लेकिन कारोबार में घाटा होने पर दोनों बुरी तरह टूट गए। परिजनों का कहना है कि बाउंसर दोनों को जान से मारने की धमकी देते थे, इसकी वजह से ही उसने ऐसा कदम उठाया। परिवार ने इंसाफ की मांग की है।
घटना के बाद ज्वेलर्स में रोष, कारोबार में हो रहा था घाटा, सरकार बनाए नीति...
चांदनी चौक इलाके में एक साथ दो ज्वेलर भाइयों के आत्महत्या करने के बाद से कारोबारियों में खासा रोष है। कारोबारियों का कहना है कि लगातार कारोबारियों को घाटा हो रहा है, जिसकी वजह से लोग ऐसे कदम उठाने को मजूबर हैं। लॉक डाउन के बाद कई कारोबारियों ने कर्जा लिया है, अब वह अपना कर्जा नहीं चुका पा रहे हैं। चांदनी चौक की द बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने बताया कि मौजूद समय में ज्वेलर्स काफी खराब स्थिति से गुजर रहे हैं। सोना आसमान छू रहा है। ऐसे में सोने के खरीदर नहीं है। सरकार को कोई पॉलिसी बनाकर ज्वेलर्स के बारे में सोचना चाहिए।