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साइलेंट किलर बन रहा फैटी लिवर: चार गुना बढ़ जाती है मधुमेह होने की आशंका, गरीबों में दिख रहा ज्यादा मोटापा

Mon, 06 Mar 2023 10:29 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोटापा से पीड़ित 50 से 75 फीसदी मरीजों में फैटी लीवर पाया जाता है। यह मरीज आसानी से 13 तरह के कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक सहित गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मोटापा बढ़ने पर सतर्क होने की जरूरत है। मोटापे से ग्रस्त 75 फीसदी लोगों के लिवर में वसा बढ़ रही है। मतलब वह फैटी लिवर की गिरफ्त में हैं। यह शरीर को कई गंभीर बीमारियों का घर बनाता है। ऐसे लोगों का लिवर फेल होने के मामले आ रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो वसा बढ़ने से लिवर अपना सामान्य क्रियाकलाप भी नहीं कर पाता। दूसरी कई जटिलताएं पैदा होने के साथ इससे कई बार लिवर काम करना बंद देता है। एम्स के एक अध्ययन से पता चला है कि इस तरह के करीब पांच फीसदी मामले सामने आ रहे हैं। इसमें बढ़ोतरी भी देखी जा रही है।

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. नवल के विक्रम ने बताया कि मोटापा बढ़ने के साथ मधुमेह होने की आशंका चार गुना तक बढ़ जाती है। इसके अलावा अन्य बीमारियां भी शरीर में घर कर लेती हैं। मोटापा से पीड़ित 50 से 75 फीसदी मरीजों में फैटी लीवर पाया जाता है। यह मरीज आसानी से 13 तरह के कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक सहित गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। वहीं, प्रोफेसर डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि एम्स में करीब 400 बायोप्सी के डाटा पर अध्ययन किया गया। इसमें 100 में से पांच का लिवर फेल पाया गया। इनमें ज्यादातर मरीज फैटी लिवर के शिकार थे। डॉक्टरों ने कहा कि पेट के भाग पर जमा होने वाला वासा ज्यादा खतरनाक है। यह हमारे कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचता है।

जांच संभव
डॉ. नवल ने बताते हैं कि फैटी लिवर की जांच के लिए एडवांस विधि आ गई है, जो अल्ट्रासाउंड की तरह है। इससे काफी हद तक समस्या का पता चल जाता है। इसके अलावा लोगों को अपना बॉडी इंडेक्स को बरकरार रखना चाहिए।

स्वस्थ भोजन से घट सकता है वजन
एम्स की प्रोफेसर डॉ. वंदना जैन ने कहा कि दवाइयों की जगह स्वस्थ भोजन से भी मोटापा कम किया जा सकता है। एम्स ने मोटापा के शिकार 10 बच्चों का दो ग्रुप बनाया था। एक ग्रुप को दवाइयां दीं, जबकि दूसरे ग्रुप को स्वस्थ भोजन दिया। अध्ययन में पाया गया कि दोनों ग्रुप में वहीं परिणाम आए। ऐसे में स्वस्थ भोजन से ही मोटापा कम करना अच्छा है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों का वजन जन्म के समय कम रहता है और बाद में मोटापा बढ़ता है, उनमें समस्या बढ़ सकती है। ऐसे बच्चों के लिए शुरू से अच्छी आदत रहनी चाहिए। बाजार की जगह घर का बना स्वस्थ भोजन देना चाहिए। जूस की जगह फल देना को प्राथमिकता देनी चाहिए। छोटे बच्चे कम से कम 9 घंटे और बड़े बच्चे कम से कम आठ घंटे की नींद पूरी करें।

कोरोना के बाद बढ़ी मोटापे की सर्जरी
एम्स के प्रोफेसर डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के बाद मोटापे को कम करनी की सर्जरी की मांग बढ़ी। 30 से 50 साल के व्यक्ति ज्यादा सर्जरी करवाने आए। इसके अलावा जिनके घुटने खराब हैं उन्हें भी मोटापे को कम करने के लिए सर्जरी करवानी पड़ी। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अध्ययन के दौरान यह देखा गया कि जिन्होंने अपना वजन कम किया वह कोरोना से कम गंभीर हुए। उन्हें आईसीयू तक जाने की जरूरत नहीं पड़ी। उनकी समस्याएं भी कम गंभीर रही। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वजन कम करना समस्या नहीं है। घटाए गए वजन को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है।

गरीबों में दिख रहा ज्यादा मोटापा
एम्स के प्रोफेसर डॉ. कौशिक सिन्हा ने कहा कि अध्ययन के दौरान यह देखा गया है कि गरीब लोगों में मोटापा ज्यादा मिल रहा है। दरअसल इनके खाने में प्रोटीन की जगह ऐसे तत्व ज्यादा है क्वालिटी ऑफ फूड नहीं है। इससे मोटापा बढ़ता है। इसके अलावा घबराहट, तनाव, चिंता, अकेलापन भी खाने की आदत को बढ़ा रहा है। जिससे मोटापा बढ़ता है।

मोटापा से हो सकती है यह समस्या
- कैंसर
- लिपिड
- मानसिक विकार
- बांझपन
- गैर अल्कोहल वसायुक्त रोग
- उच्च रक्तचाप
- मधुमेह टाइप 2
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क्यों बढ़ता है मोटापा
- अनुवांशिक
- पर्यावरण
- लाइफ स्टाइल
- नींद
- मनोवैज्ञानिक कारण
- मानवीय व्यवहार
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