दिल्ली के सिंघू बार्डर पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन में रोज नए रंग दिखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां सैकड़ों किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे है और केंद्र सरकार पर हमलावर हो रहे है, वहीं दूसरी ओर कुछ युवा किसानों ने दिल्ली बार्डर पर गरीब बच्चों की 'फुलवारी' सजा ली है।
इसमें वे बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ साथ पेटिंग और इंग्लिश बोलना सीखा रहे हैं। युवा अन्नदाता अपने जत्थे में रोज सुबह 11 से दोपहर 2.30 बजे तक बच्चों की कक्षा लगाते हैं। इसमें उन्हें लिखने-पढ़ने के लिए कॉपी और किताबें भी दे रहे हैं।
किसान आंदोलन में गुरदासपुर से हिस्सा लेने आईं कंवलजीत कौर ने अमर उजाला को बताया, 'हम लोग किसान भाई-बहनों के समर्थन में सिंघू बार्डर पर आए हुए हैं। शुरुआत के एक या दो दिन तो बहुत ही सामान्य तरीके से बीत गए। इसके बाद हमने आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले गरीब बच्चे और सड़कों पर घूमने और कूड़ा कचरा बीनने वाले बच्चों को लेकर पढ़ाना और लिखाना शुरू कर दिया। हमारी क्लास में अब रोजाना 60 बच्चे शामिल होते हैं। इसे हमने फुलवारी नाम दिया है।
जम्मू कश्मीर से आए युवा जीवनजोत सिंह भी इस टीम का हिस्सा है। उन्होंने अमर उजाला को बताया, 'फुलवारी में पढ़ने आने वाले बच्चों का पहले हम स्तर जांचते हैं कि वे कितना लिखना-पढ़ना जानते हैं। इसके बाद ही हम उन्हें आगे सिखाते हैं। हम बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी के अक्षर पहचानने से लेकर गणित के पहाड़े तक सीखा रहे हैं। कुछ बच्चे जो पढ़ने-लिखने में ठीक हैं उन्हें हम अंग्रेजी में अपना परिचय कैसे दें, ये भी बता रहे हैं।
पेंटिंग, संगीत में ज्यादा रुचि
कंवलजीत कौर आगे बताती हैं कि फुलवारी में न केवल बच्चे शामिल हो रहे हैं बल्कि युवा भी आ रहे हैं। वे रोज शाम चार बजे अपने वाद-विवाद के विषय को तय कर उस पर चर्चा भी करते हैं। युवाओं और अन्य लोगों के लिए एक अस्थाई छोटी लाइब्रेरी भी बनाई गई है। वे जत्थे में ही बैठकर किताबें भी पढ़ सकते हैं। पढ़ाई के अलावा हम बच्चों और युवाओं की काउंसलिंग भी कर रहे हैं।
जीवनजोत सिंह ने बताया, 'गरीब बच्चे सबसे ज्यादा रुचि पेंटिंग और संगीत में ले रहे हैं। ड्राइंग शीट्स और पेंसिल कलर हम बच्चों के लिए रोज लेकर आते हैं। पहले हम उन्हें बेसिक ड्राइंग कैसे करना ये सिखाते हैं। इसके बाद वे अपनी मर्जी से ड्राइंग करते हैं। हमारे पास विषयों में पारंगत 8 युवा लोगों की एक टीम है। वे ही बच्चों को पढ़ाते और सीखाते हैं।'
आंदोलन के बाद एनजीओं को सौंप जाएंगे बच्चे
आंदोलन खत्म होने के बाद बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा इस सवाल पर कंवलजीत का कहना है कि क्लास में पढ़ने आने वाले कुछ बच्चों ने तो कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है, अब वे पढ़ाई में थोड़ी रुचि ले रहे हैं। उनकी पढ़ाई में दिलचस्पी बनी रहे इसलिए हम उन्हें किसी अच्छे एनजीओ की सौंप जाएंगे। जिस बच्चे की रुचि होगी वे अपनी आगे पढ़ाई जारी रख सकेगा।'