सुबह सात बजे से ही मदरसन कंपनी के बाहर धरने पर बैठे श्रमिक, बड़ी संख्या में पुलिस बल रहा तैनातसंवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-37 स्थित मदरसन कंपनी के बाहर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को दूसरे दिन भी हालात तनावपूर्ण बने रहे। सुबह करीब सात बजे से ही हजारों कर्मचारी एक बार फिर कंपनी गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। सोमवार को प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के साथ हुई बातचीत के बावजूद लिखित आश्वासन न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने दोबारा प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति को काबू में रखने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे। इस दौरान एक बार 20 से ज्यादा कर्मचारियों को पुलिस अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गई लेकिन आगे ले जाकर उनको छोड़ दिया गया।
कंपनी गेट के बाहर सुबह से ही कर्मचारियों की भीड़ लगातार बढ़ती गई और माहौल धीरे-धीरे गरमाता चला गया। गेट के सामने बैठे कर्मचारी हाथों में बैनर लेकर वेतन बढ़ाओ और न्याय दो के नारे लगा रहे थे। कंपनी के प्रतिनिधि बीच-बीच में बाहर आकर कर्मचारियों को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने न आने से भीड़ शांत नहीं हुई। वहीं, गेट के बाहर खड़ी पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए रही और हर हलचल को बारीकी से मॉनिटर करती रही। मौके पर दृश्य बेहद मार्मिक और तनावपूर्ण नजर आया। कई कर्मचारी पेड़ों के नीचे बैठकर शांतिपूर्वक विरोध जता रहे थे।
लिखित आश्वासन चाहते हैं कर्मचारी
सोमवार को सरकार, प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच एक सहमति बनी थी, जिसके बाद प्रदर्शन खत्म हुआ था लेकिन मंगलवार को कर्मचारी फिर भड़क गए। उनका आरोप है कि प्रबंधन सिर्फ मौखिक आश्वासन दे रहा है, जबकि वे चाहते हैं कि समझौते की शर्तों का लिखित नोटिस कंपनी के मुख्य गेट पर चस्पा किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक गेट पर आधिकारिक सूचना नहीं लगेगी, वे प्रबंधन की बातों पर भरोसा नहीं करेंगे। इसी अविश्वास की खाई ने मंगलवार को फिर से हजारों मजदूरों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया।
36 डिग्री की तपिश और उबलता आक्रोश
मंगलवार को शहर का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन हक की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों के हौसले पस्त नहीं हुए। सुबह से ही कर्मचारी कंपनी के बाहर सड़क और पेड़ों के नीचे डेरा जमाए बैठे थे। पुरुष कर्मचारी सिर पर गमछा लपेटे और महिलाएं अपनी चुनरियों से धूप का बचाव करती नजर आईं। भूखे-प्यासे ये मजदूर सिर्फ एक ही मांग कर रहे थे कि उनकी न्यूनतम सैलरी 20 हजार रुपये की जाए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारी लिखित आश्वासन पर अड़े रहे।
20 हजार वेतन की मांग
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा वेतन है। कर्मचारियों की मांग है कि मासिक वेतन कम से कम बीस हजार रुपये किया जाए, जबकि कंपनी प्रबंधन 15,200 देने की बात कर रहा है। कर्मचारियों का तर्क है कि इस राशि में से 2 से 2.5 हजार रुपये पीएफ और ईएसआई में कट जाते हैं, जिससे हाथ में केवल 12-13 हजार ही बचते हैं। महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है, इसी कारण उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
नौ हजार कर्मचारी करते हैं काम
कर्मचारियों के अनुसार इस कंपनी में करीब एक शिफ्ट में तीन हजार लोग काम करते है व इतनी की संख्या में तीनों शिफ्टों में करीब नौ हजार कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें फरीदाबाद, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले मजदूर शामिल हैं। लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे इन कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा सैलरी में घर चलाना मुश्किल हो गया है। खासकर महिला कर्मचारियों ने भी खुलकर हिस्सा लिया और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनका कहना है कि जब तक स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कर्मचारियों को पुलिस वैन में ले जाते समय धक्का-मुक्की
दोपहर के समय जब माहौल बिगड़ने लगा, तो पुलिस ने एक्शन लिया। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को घेर लिया। दोपहर करीब 12:15 बजे पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन को हिंसक रूप लेने से रोकने के लिए कर्मचारियों को खदेड़ना शुरू कर दिया था। प्रदर्शनकारियों को महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों ने जबरन खींचकर पुलिस बसों और वैन में बिठाना शुरू कर दिया। कई महिला कर्मचारियों को पुलिस वैन में ले जाते समय धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस का मुख्य उद्देश्य हाईवे और औद्योगिक क्षेत्र में यातायात को सुचारू रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना था। बाद में इन सभी को शहर के बाहरी हिस्सों में ले जाकर छोड़ दिया गया।