कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारोपी और पांच लाख रुपये के इनामी विकास दूबे ने छह दिनों के दौरान 1300 किलोमीटर का सफर तय कर लिया। कई राज्यों में अलर्ट किए जाने के बावजूद विकास आराम से पहले कानपुर से औरैया, वहां से दिल्ली, इसके बाद फरीदाबाद और फिर उज्जैन तक जा पहुंचा। इस सफर के दौरान कई बार विकास दुबे बस में सवार हुआ तो कई बार ट्रक एवं दुपहिया चालकों से उसने लिफ्ट मांगी।
कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के गांव बिकरू में एक डीएसपी, एक इंस्पेक्टर समेत आठ लोगों की हत्या के बाद कुख्यात गैंगस्टर विकास दूबे बीते छह दिनों से पुलिस के साथ आंख-मिचौली खेल रहा था।
वह दो जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद 8 जुलाई को करीब 1300 किलोमीटर का तय कर उज्जैन के महाकाल मंदिर तक जा पहुंचा। 2 जुलाई को वह साइकिल से घटनास्थल से चंद किलोमीटर दूर शिवली पहुंचा।
वहां से दो दिन बाद औरेया पहुंचा। इसके बाद 5 जुलाई को बस पकड़कर दिल्ली आ गया। दिल्ली से ऑटो के जरिए वह बदरपुर बॉर्डर तक आया और फिर फरीदाबाद की सीमा में घुस गया। इस दौरान उसके दोनों खास गुर्गे अमर दुबे और प्रभात उर्फ कार्तिकेय मिश्रा भी साथ थे।
5 जुलाई की रात गुर्गों के साथ विकास ने फरीदाबाद के न्यू इंद्रा कांप्लेक्स में रहने वाले अपने रिश्तेदार श्रवण के घर पर काटी। इसके बाद 6 जुलाई को उसने फरीदाबाद के ही बड़खल मोड़ स्थित एक ओयो गेस्ट हाउस में अंकुर के नाम से कमरा बुक कराया।
7 जुलाई को स्थानीय पुलिस को जब विकास दुबे के गेस्ट हाउस में छिपे होने की खबर मिली तो वहां दबिश दी, मगर पुलिस की दबिश से करीब डेढ़ घंटे पहले ही विकास और उसका गुर्गा प्रभात वहां से चेकआउट कर चुके थे। इसके बाद पुलिस गेस्ट हाउस में दर्ज कराए गए अंकुर मिश्रा के न्यू इंद्रा कांप्लेक्स स्थित घर पहुंची। वहां से भी तब तक विकास दुबे ऑटो से फरार हो चुका था।
हालांकि पुलिस ने एनकाउंटर के बाद उसके गुर्गे प्रभात और रिश्तेदार श्रवण एवं अंकुर को धर दबोचा था। इसके बाद पुलिस ने पूरे फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली बॉर्डर, पलवल के साथ ही यूपी से मिलती सीमाओं पर नाकेबंदी कर दी थी। इसके बावजूद विकास पुलिस चौकसी को धता बताकर उज्जैन तक जा पहुंचा।