फरीदाबाद। महामारी के दौरान कोरोना योद्धा कहे जाने वाले लैब टेक्नीशियन अब नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं। सरकार ने जिले के 20 लैब टेक्नीशियन की नौकरी बिना किसी सूचना दिए एक अप्रैल से खत्म कर दी। इस कारण बीके नागरिक अस्पताल परिसर में आठ माह पहले स्थापित की गई मॉलिक्युलर लैब पर ताला लटका है। जिले में कोरोना जांच पूरी तरह बंद है। मौजूदा समय में लिए जा रहे कोविड नमूनों की जांच भी गुरुग्राम स्थित ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई भारत सरकार उपक्रम) के भरोसे है।
नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों से बात करने पर पता चला कि मौजूदा समय में केवल एक व्यक्ति के भरोसे कोरोना जांच कराई जा रही है। ऐसे में टीकाकरण से पूर्व जांच की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। केवल आपात मामलों में ही कोरोना जांच की जा रही है। वहीं, लगातार दो साल तक जान का जोखिम उठाकर अपनी सेवाएं देने वाले लैब टेक्नीशियन को बिना किसी पूर्व जानकारी के नए वित्तिय वर्ष से नौकरी से हटा दिया गया। इन लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के जानलेवा होने पर उन्हें कोरोना योद्धा का नाम देकर सम्मानित किया गया। अब सरकार ने हालात सामान्य होते ही उनके मुंह की रोटी तक छीन ली है।
819 कोरोना नमूनों की जांच लंबित
कोरोना मामलों के घटने का एक कारण जांच में कमी भी है। इन दिनों नाम मात्र जांच ही की जा रही है। वहीं लंबित जांच रिपोर्ट की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले के सरकारी निजी संस्थान में बीते 24 घंटों में 576 नए जांच नमूने लिए गए। वहीं लगातार कई सप्ताह से जांच रिपोर्ट लंबित है। शुक्रवार तक जिले की 819 आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट लंबित रहीं।
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हड़ताल पर गए कर्मचारियों की अलग-अलग मांग है। कुछ के पद कौशल निगम पोर्टल से खत्म कर दिए गए हैं। कई को समान काम समान वेतन व अनुभव अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है। इसके लिए निदेशालय से बैठक जारी है। उम्मीद है कि जल्द समाधान निकलेगा।- डॉ विनय गुप्ता, सीएमओ